आरोपों के बीच सितंबर में मिलेगा देश को पहला राफेल, रखने के लिए तैयार नहीं है जगह

Rafael the first place

नई दिल्ली। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सितंबर में देश को पहला राफेल जेट मिल जाएगा। भारतीय वायु सेना जहां इसका बेसब्री से इतंजार कर रही है वहीं अब तक इसे रखने के लिए हैंगर बनाने का काम पूरा नहीं हो पाया है। रअसल, हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन में हैंगर और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, लेकिन कॉन्टैक्टर्स की पेमेंट पूरी ना हो पाने की वजह से पिछले छह महीने से इसका काम बेहद धीमी गति से चल रहा है जो अब रुकने की कगार पर पहुंच गया है।
Among the allegations, the country will not get ready to keep Rafael the first place in September
अभी इसपर महज 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है जबकि मार्च तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। कॉन्ट्रैक्टर्स को पेमेंट न होने की वजह से कई जगह एयरफोर्स रनवे पर काम अटक गए हैं साथ ही जम्मू-कश्मीर में फौजियों के रहने के लिए बन रहे मकानों का काम भी रुक गया है। मिलिटरी इंजिनियर्स सर्विसेज बिल्डर्स असोसिएशन आॅफ इंडिया (एमईएस बीएआई) का कहना है कि देश भर में कॉन्ट्रैक्टर्स का करीब 2000 करोड़ रुपये का पेमेंट बकाया है जिसकी वजह से कई जगह काम रुक गए हैं और कई जगह रुकने की कगार पर हैं।

राफेल के हैंगर पर काम अटका
एयरफोर्स के अंबाला और हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन राफेल के इंतजार में हैं। जिसके लिए अंबाला और हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन में इनके लिए हैंगर तैयार किया जा रहा है साथ ही अप्रोच रोड का भी काम होना है। एमईएस बीएआई के प्रेजिडेंट प्रवीन महाना ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर को बकाया पेमेंट नहीं हो पाया है जिसकी वजह से वहां काम बेहद स्लो हो गया है और अब तक महज 40 पर्सेंट काम ही हो पाया है। उन्होंने कहा कि देश भर में जहां भी डिफेंस इस्टैबलिशमेंट हैं वहां एमईएस बीएआई की ब्रांच है। हमारी देश भर में 73 ब्रांच हैं जिसमें 10 हजार से ज्यादा कॉन्ट्रैक्टर हैं। उन्होंने कहा कि आज तक कभी भी पेमेंट में दिक्कत नहीं आई थी लेकिन नवंबर 2017 से दिक्कत शुरू हुई जो अभी बेहद विकराल बन गई है।

कश्मीर में फौजियों के मकान पर भी काम रुका
एमईएस बीएआई के नॉर्दन रीजन के वाइस प्रेजिडेंट करन कपूर ने बताया कि करगिल, लेह, पुंछ, बारामूला, रजौरी, डोडा और श्रीनगर में भी जवानों के लिए आवास बन रहे हैं लेकिन कॉन्ट्रैक्टर्स को पेंडिंग पेमेंट भी ना मिलने की वजह से करीब छह महीने से इनके काम भी रुके हैं। जम्मू-कश्मीर में फौजी घाटी के अंदर भी आतंकियों का सामना कर रहे हैं और सीमा पर दुश्मन का भी मुकाबला कर रहे हैं। कपूर ने कहा कि वहां काम करने का सीजन अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक होता है। लेकिन अगर बकाया पेमेंट नहीं हो पाया तो इस सीजन काम नहीं हो पाएगा।

फंड की भारी कमी, 2000 करोड़ रुपये बकाया
एमईएस बीएआई के कोषाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने बताया कि हम लोग पिछले साल फरवरी से लगातार बकाया पेमेंट का मसला उठा रहे हैं। रक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद पिछले साल दिवाली से पहले 250 करोड़ रुपये रिलीज भी किए गए जबकि हमसे वादा किया गया था कि पूरा बकाया यानी 1600 करोड़ रुपये रिलीज कर दिए जाएंगे। जिसके बाद हम पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से लेकर रक्षा राज्य मंत्री सबसे मिले। लेकिन सबसे बस भरोसा ही मिला। उन्होंने बताया कि छह महीने पहले बकाया रकम 1600 करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर 2000 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें सबसे बड़ा अमाउंट एयरफोर्स का और फिर आर्मी का है।

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