अन्ना ने भाजपा पर कसा तंज, कहा- उसके नेताओं को लोकपाल से नफरत हो गई है

anna ne bhaajapa par kasa tanj

रालेगण सिद्धि। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसते हुए कहा है कि उसके नेताओं को लोकपाल से नफरत हो गई है। बता दें कि बीते छह दिन में अनशन के दौरान अन्ना का वजन करीब सवा चार किलोग्राम कम हो गया है। वह लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। हजारे के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ने के बीच, शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से हजारे का जीवन बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की।
anna ne bhaajapa par kasa tanj, kaha- usake netaon ko lokapaal se napharat ho gaee hai
आपको बता दें कि अन्ना ने केंद्र और महाराष्ट्र में लोकपाल एवं लोकायुक्त नियुक्ति और किसानों के मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र के अहमदनगर में अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में 30 जनवरी को अनशन शुरू किया था। अन्ना ने इस बार में कहा, लोकपाल और लोकायुक्त के मेरे रामलीला मैदान आंदोलन के दौरान पूरा देश मेरे साथ खड़ा हुआ, एक माहौल बना। यही कारण है कि आप (बीजेपी) सत्ता में आए। अब आप उन लोगों से धोखा कर रहे हैं, जो आपको सत्ता में लेकर आए।

चार किलो घट गया है अन्ना का वजन
अन्ना ने कहा, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसी नेताओं ने कभी संसद में लोकपाल की मांग का पुरजोर बचाव किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद वे इस पर चुप हैं। लगता है कि उन्हें लोकपाल और लोकायुक्त से नफरत हो गई है। आंदोलन से वे सत्ता में आए लेकिन वे इसे भूल गए हैं। हजारे को देखने वाले डॉक्टर धनन्जय पोटे ने सोमवार कहा, अन्ना का वजन अब 71.1 किलोग्राम है और अनशन शुरू करने के समय से उनका सवा चार किलोग्राम वजन घट चुका है। उनका रक्तचाप भी अनशन के कारण बढ रहा है।

गांववालों ने हजारे के स्वास्थ्य पर नजर रखने और प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने के लिए पोटे से कहा है। सरकारी अधिकारियों सहित कई लोगों ने बीते छह दिन में हजारे से बात करके उनसे अनशन खत्म करने को कहा है। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और जल पुरुष नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने सोमवार को हजारे से मुलाकात की और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। ठाकरे ने हजारे से कहा कि वह बेकार सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान ना दें। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनसे समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायणन की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा। उद्धव ने रविवार को हजारे के आंदोलन को समर्थन दिया था।

अन्ना ने दी मांग न मानने पर पद्म भूषण लौटाने की चेतावनी
अन्ना यह भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर मोदी सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए तो वह पद्म भूषण पुरस्कार वापस कर देंगे। राज ठाकरे ने हजारे से अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को दफन करने के लिए उनके साथ मिलकर राज्य का दौरा करने का अनुरोध किया। राज ठाकरे और अन्ना ने यादव बाबा मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में 20 मिनट बैठक की। बैठक के बाद ठाकरे ने हजारे के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर देश को धोखा देने और अपनी ही पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।

ठाकरे ने कहा, मैंने अन्ना से अपील की है कि वह इस बेकार सरकार के लिए अपने जीवन का बलिदान नहीं दें। मैंने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके किसी वादे पर भरोसा नहीं करने को कहा है। मोदी ने 18 दिसंबर 2013 को लोकपाल विधेयक के समर्थन में ट्वीट किया था। मोदी सरकार के पांच साल पूरे हो चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। साल 2013 में अन्ना के आंदोलन के कारण ही आज लोग सत्ता में हैं। उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए।

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