रिश्वतखोर तत्कालीन जपं सीईओ समेत 7 को दो-दो साल की सजा

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शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार करने पर जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ सहित 7 आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय ने दो-दो साल के सश्रम कारावास एवं 2 लाख 60 हजार रुपए के जुमार्ने की सजा सुनाई गई हैे हर एक आरोपी पर चालीस हजार का जुमार्ना लगाया गया हैे
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत दो अगस्त-08 से 20 फरवरी-09 तक ग्राम पंचायत बाईहेड़ा में ग्राम बाईहेड़ा से सतगांव तक 1.5 कि मी लंबाई की मिट्टीकृत सड़क निर्माण कार्य हेतु ग्राम पंचायत बाईहेड़ा को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया था। इसी प्रकरण में आरोपितों ने भ्रष्टाचार किया और कोर्ट ने बुधवार को सजा से दंडित किया। शाजापुर जनपद के तत्कालीन सीईओ सुनील खत्री, आरईएस एसडीओ अशोक कुमार मेहरे समेत सात आरोपितों को सजा सुनाई गई हैे तत्कालीन सीईओ खत्री व एसडीओ मेहरे को लगातार तीसरे मामले में सजा सुनाई गई। दो सजाएं पूर्व में सुनाई जा चुकी हैं। सीईओ एवं एसडीओ ने तीनों मामलों में शासन को 6.65 लाख रुपए की हानि पहुंचाई। तीसरे मामले में 2.75 लाख रुपए का नुकसान किया गया।
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सीईओ व एसडीओ के अलावा आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) के सब इंजीनियर यशवंतसिंह कराड़ा, पंचायत समन्वयक मकसूद एहमद कु रैशी, बाईहेड़ा सरपंच भंवरलाल, बाईहेड़ा सचिव सुरेंद्रसिंह परिहार को धारा 13(1)डी, सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में दोषी पाते हुए प्रत्येक को दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20-20 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित कि या गया। वहीं धारा 120बी के तहत भी इतनी ही सजा सुनाई गई। एक अन्य आरोपित सतगांव सचिव इंदरसिंह चौधरी को धारा 120(बी) आईपीसी के तहत दो साल की सजा एवं 20 हजार रुपए का जुमार्ना किया गया है।
ग्राम बाईहेड़ा से सतगांव सीमा तक सड़क निर्माण के लिए जो राशि स्वीकृत हुई थी, उसमें मुख्य रुप से यह शर्त डाली गई थी कि सड़क निर्माण कार्य में शत-प्रतिशत जॉब कार्डधारी परिवार के व्यस्क सदस्य एवं कम से कम 1/3 महिलाओं को लगाया जाए। जेसीबी मशीन का प्रयोग वर्जित कि या गया था एवं मजूदरों को भुगतान के पश्चात मस्टरों की एक प्रति संबंधित ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत के नोटिस बोर्ड पर चस्पा हेतु भुगतान के सात दिवस में उपलब्ध कराई जाने का उल्लेख थो लेकिन आरोपितों ने उक्त शर्तों का पालन न करते हुए उक्त सड़क निर्माण कार्य में शासन को दो लाख 75 हजार 893 रुपए की आर्थिक क्षति पंहुचाते हुए स्वयं अवैध रुप से लाभ प्राप्त किया। सूत्र सूचना के माध्यम से लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिक जांच पंजीबद्ध कर की। जांच उपरांत जांच सिद्ध पाए जाने पर आरोपितों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कि या गया। फिर विवेचना अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कि या गया। प्रकरण में उक्त कार्य तकनीकी प्राक्कलन अनुसार किया जाना चाहिए था। जिसमें उक्त मार्ग की लागत प्राक्कलन अनुसार 8 लाख तीन हजार 599 रुपए थी। माप पुस्तिका अनुसार कार्य की लागत चार लाख 80 हजार 702 रुपए थी एवं भौतिक सत्यापन के आधार पर कार्य की अनुमानित लागत दो लाख चार हजार 809 रुपए पाई गई। इस प्रकार दो लाख 75 हजार 893 रुपए की राशि आरोपितों द्वारा आपराधिक षड़यंत्र कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए स्वयं अवैध रुप से लाभ प्राप्त कि या।
मप्र शासन के स्पष्ट निर्देश प्राप्त होने पर भी उक्त आरोपितों द्वारा उन निदेर्शों का पालन नहीं कि या गया और मजदूरी का भुगतान सीधे संबंधित मजदूरों के बैंक खातों में नहीं कि या। मस्टर रोल पर जानबूझकर अंगुष्ठ चिन्ह इस रुप में कि सी व्यक्ति के कराए गए हैं, जिससे वे कि स व्यक्ति के है इसकी कभी स्पष्ट पहचान न हो सके । मजदूर दुलेसिंह के खाते में 38 हजार रुपए, प्रभुलाल के खाते में 38 हजार रुपए, हरिनारायण के खाते में 35 हजार रुपए, शरीफ के खाते में 32 हजार 957 रुपए, इंदरसिंह के खाते में 35 हजार रुपए, सुरेशसिंह के खाते में 38 हजार रुपए, भंवरलाल के खाते में 30 हजार रुपए, तेजसिंह के खाते में 36 हजार रुपए जमा हुए थे। शेष कि सी भी मजदूर के खाते नहीं खुलवाए गए, जो शासन के आदेशों व निदेर्शों का स्पष्ट रुप से उल्लंघन है। उक्त आठ मजदूरों के खातों से उक्त रुपए निकाले गए थे।

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