मध्यप्रदेश सरकार 1.11 करोड़ परिवारों को हर महीने देगी चार किलो दाल, केन्द्र से भी मिलेगी सब्सिडी

1.11 crore households

भोपाल। खाद्यान्न सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले प्रदेश के एक करोड़ 11 लाख परिवारों को प्रति माह चार किलोग्राम खड़ी दाल मिलेगी। इसमें चना और मसूर दिया जाएगा। चना के लिए 27 रुपए और मसूर के लिए 24 रुपए प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। चना पर केंद्र सरकार अपनी ओर से 15 रुपए की सबसिडी भी देगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग फरवरी से यह व्यवस्था लागू कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने बाजार प्रोत्साहन योजना के तहत पूरे देश में चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की है। मध्यप्रदेश में लगभग 15 लाख मीट्रिक टन चना खरीदा गया है। यह गोदामों में भरा हुआ है।
Madhya Pradesh government to provide 1.11 crore households every month, four kg of pulses, subsidy from center
इसका उपयोग करने के लिए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत इसे वितरित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में एक करोड़ 11 लाख से ज्यादा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के हितग्राही परिवार हैं। प्रत्येक परिवार को चार किलो खड़ी दाल (चना और मसूर) दिया जाएगा। इसमें चना की मात्रा सर्वाधिक है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रति किलोग्राम 15 रुपए की सबसिडी देने का निर्णय किया है। इसके बाद चना के प्रति किलोग्राम भाव 27 और मसूर के 24 रुपए तय किए गए हैं। एक परिवार को अधिकतम चार किलोग्राम दाल ही मिलेगी।

कांग्रेस ने तीन किलो दाल देने का दिया था वचन
कांग्रेस ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दाल देने का वचन दिया था। वचन पत्र में अंत्योदय अन्न् योजना के हितग्राही परिवारों को प्रतिमाह तीन किलो और बीपीएल कार्डधारियों को भी तीन किलो दाल देने का वादा किया था। नई व्यवस्था में प्रति परिवार चार किलोग्राम दाल दी जाएगी। हालांकि, एपीएल कार्डधारियों को छह माह खाद्यान्न् देने का वचन भी दिया है, लेकिन इसे लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

खालवा और कराहल में हो चुका है प्रयोग
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने खालवा और कराहल विकासखंड में रियायती दर पर दाल देने का फैसला किया था। इन दोनों विकासखंड में अनुसूचित जनजाति के परिवारों को दस रुपए की दर से एक किलोग्राम दाल देने की व्यवस्था लागू की गई है। बड़ी मात्रा में मूंग की खरीदी को देखते हुए इसे भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली में देने का प्रस्ताव था, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ।

Leave a Response