मप्र: हजारों बालिकाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल, बालिका गृह और छात्रावासों की चहारदीवारी तक नहीं सुरक्षित

safety of thousands of girl students

रतलाम। रतलाम जिले के जावरा स्थित बालिका गृह का मामला सामने आने के बाद इस तरह के आश्रमों के साथ सरकारी छात्रावासों में रह रही हजारों बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सवाल उठने की वजह भी पुख्ता है, क्योंकि मालवा निमाड़ के जिलों में ऐसे कई छात्रावास और बालिका गृह हैं जहां बालिकाओं की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी तक सुरक्षित नहीं है। कहीं दीवारों की ऊंचाई कम है तो कहीं दीवारें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं और उन्हें सुधारने की सुध तक नहीं ली जा रही है।
MP: The question of safety of thousands of girl students, girl child and hostels are not safe till the festival
हास्यास्पद बात तो खरगोन जिले के एक छात्रावास में सामने आई है।यहां चहारदीवारी की जरूरत को ग्रीन मेटी से पूरा करने का प्रयास किया गया है। इसी छात्रावास में सुविधाघरों के पास की दीवारें भी कम ऊंचाई वाली हैं, जिससे बालिकाओं को स्नान बाद असुविधाजनक महसूस होता है। सरकारी छात्रावासों के सामने फंड की समस्या नहीं है, फिर स्थिति ऐसी क्यों है? छात्रावासों के दरवाजों पर चौकीदार तक की व्यवस्था नहीं है। सीसीटीवी कैमरों से नजर रखने की बात भी अब सोची जा रही है।

आश्रमों और छात्रावासों के सतत निरीक्षण की व्यवस्था है, लेकिन निरीक्षण हो रहा है या नहीं, निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों पर ध्यान दिया जा रहा है या नहीं यह देखने वाला कोई नहीं है। यह बात जावरा मामले की प्रारंभिक जांच में भी सामने आ चुकी है। जावरा की शर्मनाक घटना के बाद आश्रमों और छात्रावासों में चौकसी बढ़ाने पर ध्यान देने की कोशिशें शुरू हुई हैं, लेकिन घटना पुरानी होने पर लगता नहीं कि सतर्कता इसी तरह बरती जाती रहेगी।

जिले में एक बालिका और एक बालक घर संचालित है। जावरा में कुंदन वेलफेयर सोसायटी के कुंदन कुटीर बालिका गृह में बालिकाओं के यौन शोषण और प्रताड़ना की जांच के बाद विभागीय अमला सवालों के घेरे में है। प्रारंभिक जांंच में स्पष्ट हुआ है कि महिला बाल विकास विभाग के लगातार निरीक्षण नहीं करने से गड़बड़ी उजागर नहीं हो सकी और बढ़ती चली गई। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं लेकिन उनका रेंडम परीक्षण नहीं किया गया।

बालिका गृह की पूर्व संचालिका रचना भारतीय, पति ओमप्रकाश, सोसायटी अध्यक्ष संदेश जैन, सचिव दिलीप बरैया, पूर्व अधीक्षिका नेहा सिसौदिया, वर्तमान अधीक्षिका हंसा पाठक को जेल भेजा जा चुका है। खास बात यह है कि रचना के बालिका गृह में दखल के बावजूद बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष बना दिया गया। कुंदन कुटीर सील होने के बाद अब बालिकाओं को उज्जैन, मंदसौर और इंदौर भेजा गया है। बालिका गृह संचालन के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अनुदान जारी होता है। इसके अलावा रियायती दर पर अनाज भी शासकीय राशन दुकानों से आवंटित होता है। कुंदन कुटीर को 1.10 क्विंटल अनाज जारी होता था।

गंभीरता से नहीं लिया
जावरा के बालिका घर से पूर्व में भी बालिकाओं के भागने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। 24 जनवरी को पांच लड़कियों के एक साथ भागने, मंदसौर में बरामद होने के बाद उनके बयान से पूरा मामला उजागर हुआ। शासकीय छात्रावासों में भी कई बार छात्राओं ने समय पर खाना नहीं मिलने और खराब व्यवहार को लेकर शिकायतें की हैं। 1 अगस्त 2018 को जिले में सभी बालिका घर, छात्रावासों, कन्या होस्टलों की जांच कराई गई थी, लेकिन जांच में मिली कमियों को दूर करने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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