राफेल विवाद: कैग ने राष्ट्रपति को भेजी अपनी रिपोर्ट, सरकार आज संसद में कर सकती है पेश

Rafael controversy

नई दिल्ली। राफेल डील में कथित घोटाले और गड़बड़ी के कांग्रेस पार्टी के आरोपों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज दी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां राफेल डील को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। सूत्रों ने बताया है कि सरकार आज कैग की रिपोर्ट संसद में रखेगी।
Rafael controversy: CAG can submit its report to the President, the government today in Parliament
सूत्रों की मानें तो संसद में रखी जाने वाली कैग रिपोर्ट में राफेल की कीमत का जिक्र नहीं होगा। दरअसल, कैग अपनी रिपोर्ट की एक कॉपी राष्ट्रपति के पास और दूसरी कॉपी वित्त मंत्रालय के पास भेजते हैं। बताया गया है कि कैग ने राफेल पर 12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। आपको बता दें कि कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर विस्तृत जवाब और संबंधित रिपोर्ट कैग को सौंपी थी, जिसमें खरीद प्रक्रिया की अहम जानकारी के साथ 36 राफेल की कीमतें भी बताई गईं थीं।

कैग की यह रिपोर्ट काफी लंबी है, जिसे प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। अब राष्ट्रपति भवन की ओर से कैग रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर के आॅफिस और राज्यसभा चेयरमैन के आॅफिस को भेजी जाएगी। सूत्रों ने बताया है कि सरकार कैग की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में रखेगी। मौजूदा 16वीं लोकसभा का वर्तमान सत्र बुधवार को समाप्त हो रहा है और यह इसका आखिरी सत्र है। अप्रैल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोकसभा का गठन होगा।

राफेल पर नियम बदले? टीम हेड का जवाब
मीडिया रिपोर्ट में सोमवार को किए गए दावे के बीच भारतीय पक्ष की तरफ से राफेल वार्ता का नेतृत्व करने वाले एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा ने जवाब दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक पॉइंट को साबित करने के लिए कुछ नोट्स सिलेक्टिव तरीके से उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने साफ कहा कि इनमें सच्चाई नहीं है। भारतीय टीम ने जो अपनी अंतिम रिपोर्ट दी है उस पर सभी 7 सदस्यों ने बिना किसी असहमति के हस्ताक्षर किए हैं। सरकार से सरकार के बीच कॉन्ट्रैक्ट में ऐंटी-करप्शन क्लॉज पर एयर मार्शल सिन्हा ने कहा कि अब तक हमारा अमेरिका और रूस के साथ ‘सरकार से सरकार के बीच’ कॉन्ट्रैक्ट था। यह तीसरा ‘सरकार से सरकार’ कॉन्ट्रैक्ट है, जो फ्रांस के साथ हुआ। ऐसा क्लॉज इनमें से किसी के साथ नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट में नया दावा
आपको बता दें कि सोमवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार ने समझौते पर दस्तखत से कुछ दिन पहले ही मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ पेनल्टी से जुड़े अहम प्रावधानों को हटाया था। न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने सितंबर 2016 में इन्टर-गवर्नमेंटल अग्रीमेंट, सप्लाइ प्रोटोकॉल्स, आॅफसेट कॉन्ट्रैक्ट्स और आॅफसेट शेड्यूल में 9 बदलावों को मंजूरी दी।

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