भोपाल में बनेगा साउंड हीलिंग थैरेपी का रिकॉर्ड

Sound Healing Therapy

बीमारियों के इलाज से लेकर व्यक्तित्व व स्किल्स को बेहतर बनाने तक हो रहा इस थैरेपी का व्यापक इस्तेमाल
भोपाल। ट्यूनिंग फोर्क व तिब्बती सिंगिंग बाउल्स सहित विभिन्न आब्जेक्ट्स से निकलने वाली मधुर ध्वनि तरंगें जहां हमारे मन मस्तिष्क को शातं करती हैं तो वहीं इनकी गहराईयों में कई भावनात्मक व शारीरिक बीमारियों को ठीक करने मेडीसिनल पावर भी मौजूद होती हैं। यही नहीं इन तरंगों के इस्तेमाल से पॉजिटिव लाइफस्टाइल, तनावमुक्ति, व्यक्तित्व विकास व अपने स्किल्स को बेहतर बनाने में सफलता पाई जा सकती है। वर्क, स्टडी और फैमिली स्टेज्स से गुजर रहे लोगों में तो दवा से ज्यादा यह थैरेपी कारगार सिद्ध हुई है। इन खासियतों के चलते बच्चों, युवाओं एवं कारपोरेट सेक्टर में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
Record of Sound Healing Therapy in Bhopal
उक्त बात आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मध्यभारत की एकमात्र तथा देश की पाचं बड़ी साउडं हीलर्स में से एक आरती सिन्हा ने कही। यह पत्रकार वार्ता आगामी 14 फरवरी को मनाये जा रहे वर्ल्ड साउडं हीलिंग डे पर भोपाल में नेशनल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से आयोजित किये जाने वाले सामूहिक हीलिंग सेशन -हील अवर अर्थ, ही अवर भोपाल- के सिलसिले में आयोजित की गई थी। तिब्बती हीलिंग साउंड पर इस सामूहिक सेशन को भोपाल गैसकांड जैसी भयानक त्रासदी को समर्पित किया जा रहा है। साथ ही इस अवसर पर पूरी धरती के वातावरण का सुखद बनाने के लिए भी मेडीटेशन व साउंड हीलिंग थैरेपी की जायेगी। इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड्स के अधिकारियों की देखरेख में यह थैरेपी सेशन रायसेन रोड स्थित एलएनसीटी कॉलेज आॅडिटोरियम में दोपहर 12 बजे से आयोजित किया जायेगा।

श्रीमती सिन्हा ने कहा कि साउडं हीलिंग हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है जिसमें खास शब्दों के उच्चारण, मेडीटेशन, म्यूजिक, वाइब्रेशन और सिंगिंग बाउल्स आदि के जरिये लोगों को दर्द से राहत दिलाई जाती है। इस थैरेपी में मस्तिष्क की शक्तियों को ताकतवर बनाकर इम्यून सिस्टम मजबूत बनाया जाता है जिससे बीमारियों के विरूद्ध लड़ने की क्षमता बढ़ती है। मॉडर्न साइंस ने भी अपने अनेक शोधों में इस बात की पुष्टि की है। आज के तनाव व बीमारियों से भरे माहौल में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक साउंड हीलिंग थैरेपी पूरे विश्व में कारगर साबित हो रही है। आॅटिज्म, हाई ब्लडप्रेशर, डिमेंशिया, इन्सोमिया, डिप्रेशन, पेन तथा कैंसर आदि बीमारियों में इसके पॉजिटिव रिजल्ट देखे गये हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे शरीर में 70 प्रतिशत हिस्सा पानी हाते है और साउंड पानी में आसानी से टेज्वल कर सकता है। यही वजह है कि आॅर्गन की फ्रीक्वेंसी से मैच करते हुए साउंड का प्रवाह यदि शरीर में किया जाए, तो यह फ्रीक्वेंसीज के बिगड़े हुए बैलेंस को सही करने में मदद करता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि मेडीटेशन सिर्फ मेंटल रिलेक्सेशन के लिए किया जाता है लेकिन यह इसका एक उपयोग है। सिंगिंग बाउल थैरेपी में अलग-अलग आकार के बाउल्स को बीमारियों के अनुसार साउंड हीलिंग मं इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे दिमाग में एक दिन में लगभग 60 हजार विचार आकर जमा होते हैं, ऐसे में यह जरूरी है कि हम समय-समय पर मेडीटेशन के जरिये नकारात्मक विचारों को अपने दिमाग से हटाएं।

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