यूपी की तर्ज पर मप्र में भी गठबंधन करेगी सपा-बसपा, भाजपा-कांग्रेस से असंतुष्ट नेताओं की उम्मीदें बढ़ीं

coalition alliance

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजों और डेढ़ दशक बाद कांग्रेस के सरकार में लौटने से सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रभारी जगदेव सिंह यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी सपा, बसपा के साथ चुनावी गठबंधन करेगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के असंतुष्टों की निगाहें भी इस गठबंधन पर टिकी हैं।
SP-BSP, BJP-Congress alliance partners to form coalition alliance in Uttar Pradesh
उप्र में लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा गठबंधन एवं सीटों के बंटवारे से भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इस कारण भाजपा और कांग्रेस में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सपा के प्रदेश प्रभारी जगदेव सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए मप्र में भी सपा-बसपा का चुनावी गठबंधन होगा। इसके लिए बसपा प्रमुख मायावती और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच चर्चा चल रही है। जल्द ही अंतिम निर्णय का एलान होगा। सपा की मप्र इकाई का गठन होते ही इसका भी खुलासा कर दिया जाएगा।

उधर, लोकसभा चुनाव लड़ने को आतुर भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने बगावती तेवर भी दिखाने शुरू कर दिए हैं। इनमें ज्यादातर लोग सपा-बसपा के संभावित गठबंधन की राह देख रहे हैं, जिन नेताओं ने संसदीय क्षेत्र में अपनी प्रारंभिक चुनावी तैयारी कर ली है, उन्होंने अपने दोनों ‘ए और बी प्लान” पर काम शुरू कर दिया है। दोनों ही दलों के नेताओं ने मन बना लिया है कि किसी कारणवश उनका अपनी पार्टी से टिकट फाइनल नहीं हो पाया तो ऐसी स्थिति में सपा-बसपा के गठबंधन का दामन थाम लिया जाएगा। इसके लिए कई नेताओं ने लखनऊ जाकर अपनी लॉबिंग भी कर ली है।

पहले होगा प्रदेश इकाई का गठन उल्लेखनीय है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मप्र इकाई हाल ही में भंग कर चुके हैं। इसलिए पहले यहां प्रदेश इकाई का गठन होगा। इसके बाद लोकसभा चुनाव की तैयारी, गठबंधन-टिकट बंटवारे और वितरण की रणनीति सार्वजनिक की जाएगी। बताया जाता है कि कतिपय नेता ऐसे भी हैं, जो अपनी मूल पार्टी कांग्रेस-भाजपा पूर्व में छोड़ चुके हैं। अब वे लोकसभा चुनाव के जरिए धमाकेदार वापसी की सियासी उम्मीदें पाले हुए हैं। कुछ नेता विधानसभा चुनाव में सफल नहीं हो पाए, इसलिए अब वे संसदीय चुनाव के जरिए अपनी राजनीति चमकाने में जुट गए हैं।

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