टीवी रिपोर्टिंग के किस्से और कहानियां

kisse aur kahaaniyaan

ब्रजेश राजपूत

टीवी रिपोर्टिंग के किस्से कहानियों की अपनी किताब #ऑफदस्क्रीन को बाजार में आये अभी सात महीने ही हुये हैं मगर बिना किसी विमोचन की औपचारिकता के किताब पाठकों तक पहुंच रही है और सुर्खियां पा रही है, ये मेरे लिये संतोष की बात है। टीवी रिपोर्टर के रोजमर्रा के काम उसमें आने वाली मुश्किलों और कहानियों के व्यापक किरदारों को समेटने वाली इस किताब पर पत्रकार रवीश कुमार, राजदीप सरदेसाई, पुण्य प्रसून बाजपेयी, आशुतोष, संजय सिन्हा, दिवांग, रशीद किदवई, राजेश बादल, दीपक तिवारी, प्रवीण दुबे जैसे पत्रकारों के साथ जयप्रकाश चौकसे, पंकज सुबीर, गीताश्री भी पढकर लिख चुकीं हैं मगर फिर भी कुछ कमी थी मन में जो कल शाम पूरी हो गयी।
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जी हां मेरे सबसे पसंदीदा लेखक और मशहूर व्यंग्यकार डा ज्ञान चतुर्वेदी ने #ऑफदस्क्रीन पर मेरे साथ भोपाल की स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में डेढ घंटे तक चर्चा की। किताब को पढने के बाद किसी पाठक के मन में उठे सवालों को जिस चुटीले अंदाज में ज्ञान जी ने पूछा उसे सुनना अलग ही अनुभव था। सवाल पूछने वाले प्रोफेसन में रहने के बाद भी मैंने पहली बार जाना कि घुमा घुमाकर पूछे गये सवालों के जबाव देना कितना मुश्किल होता है। ज्ञान जी के कुछ सवालों की बानगी देखिये

– टीवी पत्रकार अखबार के पत्रकार में क्या फर्क है ?
– टीवी पत्रकार हर जगह तुरंत कैसे पहुंच जाता है ?
– टीवी पत्रकार घर परिवार को कब वक्त दे पाता है ?
– सरकार के खिलाफ खबर करने पर जो दबाव आते हैं उनसे कैसे निपटते हो ?
– आप बडे पत्रकार हैं तो अब तक पत्रकार क्यों हो कुछ और क्यों नहीं बन गये, लोग बन जाते हैं ?
– खबर बनाते बनाते जब आप खुद खबर बन जाते हो तो कैसा लगता है ?
– टीवी की कहानियों के लिये इतने सारे लाइव भांति भांति के कैरेक्टर आप कैसे तलाश लेते हो ?
– इतने संवेदनशील मन के साथ कब तक पत्रकार रहोगे कथाकार बनने का मन होता है या नहीं ?
और भी बहुत सारे चुटीले गुदगुदाने वाले सवाल। हैरानी की बात ये रही कि ज्ञान जी की पारखी निगाहों से किताब का कोई पन्ना बाकी नहीं रहा और यही बडा कथाकार बताता कि विषय की तैयारी कैसे मनोयोग से करना चाहिये।
बहुत शुक्रिया डा ज्ञान चतुर्वेदी जी का, विजय बहादुर सिह जी का, मंजुल पब्लिकेशन की नेहा श्रीवास्तव का और स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी के यतीश भटेले का जिनके प्रयासों से ये आयोजन हुआ। कार्यक्रम में आये अतिथियों का भी दिल से आभार

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