हम तो डूबे हैं सनम, तुझको भी ले डूबेंगे…
शशी कुमार केसवानी
वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर तस्वीर अब साफ होती जा रही है। भाजपा ने 228 और कांग्रेस ने सभी सीटों पर 2३० प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। दोनों ही दल अपने बागियों से जबरदस्त तरीके से जूझना पड़ रहा है। साथ ही साथ इन्हें मनाने-समझाने की कोशिश भी जारी है। साथ ही लालीपॉप देने की बातें हो रही हैं। अगर सत्ता में तो आपको किस-किस तरह के पद दिए जाएंगे। इस पर भी अभी से ही मोलभाव चल रहे हैं। साथ में यह भी बताया जा रहा है कि मैदान में आपके डंटे रहने से क्या नुकसान होंगे। हालांकि इन बागियों के पीछे दोनों पार्टियों के कुछ बड़े नेताओं के हाथ रहता है, जिससे समय आने पर अपने ताकत का उपयोग करके उन्हें अपने पक्ष में लाकर पार्टी में कद बड़ा करते हैं। यह एक पुरानी परंपरा है जो हर चुनाव में नजर आती है। पर इस बार स्थिति कुछ बदली हुई है, इस बार धन को उपयोग जबरदस्त तरीके से हो रहा है।
यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाराज नेताओं को मनाने में जुट गए हैं। उधर, कुछ नेताओं ने तो दूसरे दलों का दामन थामकर टिकट भी ले लिया है और ये चुनावी समीकरण बिगाडऩे में अपनी भूमिका निभाएंगे। बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बागियों ने चुनाव परिणाम प्रभावित किया था। इस बार भी कुछ बागी कुछ सीटों पर जरूर समीकरण बदलकर रख देंगे। ज्यादा नुकसान भाजपा का होगा, क्योंकि लंबे समय से सत्ता में रही पार्टी में बागियों की गिनती ज्यादा है और वहीं साथ के नेताओं को भी जब तक नीचे नहीं गिराएंगे, तब तक ऊपर कैसे आएंगे। कुछ साल पहले तक भाजपा में यह संस्कृति कम पनपी थी अब चरम पर है।
टिकट वितरण होने के साथ ही प्रदेश की कुछ सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने उनके अपने ही चुनौती बनकर खड़े हो गए हैं। सीधी से भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ल टिकट न मिलने से नाराज होकर मैदान में उतर गए हैं। उनके चुनाव लडऩे से भाजपा और कांग्रेस, दोनों को नुकसान होगा। यही स्थिति चाचौड़ा में भी बन गई है। यहां से पूर्व विधायक रहीं ममता मीणा भाजपा का साथ छोडक़र आप के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गई हैं।
यहां कांग्रेस ने लक्ष्मण सिंह और भाजपा ने प्रियंका मीणा को प्रत्याशी बनाया है। सागर से पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के पुत्र सुधीर यादव बंडा, लहार से पूर्व विधायक रसाल सिंह और पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह के पुत्र राकेश सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं। मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी को भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बनाया। उन्होंने अपनी विंध्य विकास पार्टी बना ली है और वे पूरे विंध्य क्षेत्र में प्रत्याशी लड़ाने की तैयार में हैं।
यादवेंद्र सिंह ने बसपा की सदस्यता ली
इसी तरह कांग्रेस की बात करें तो यहां बगावत पार्टी को चिंता में डाल रही है। सुमावली से विधायक अजब सिंह कुशवाह ने टिकट न मिलने से नाराज होकर चुनाव लडऩे का एलान कर दिया है। उन्होंने इसके पहले 2018 में उन्होंने बसपा के टिकट चुनाव लड़ा था।
जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ एदल सिंह कंसाना भी भाजपा में चले गए थे तो उपचुनाव में कांग्रेस ने कुशावह पर दांव लगाया और वे विजयी रहे थे। इसी तरह नागौद सीट से पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह ने टिकट न मिलने पर बसपा की सदस्यता ली और अब चुनाव मैदान में हैं। वे पिछला चुनाव 1,234 मतों से हार गए थे।
मुरैना से विधायक राकेश मावई भी टिकट कटने से आहत हैं और उन्होंने कांग्रेस के लिए प्रचार न करने का निर्णय लिया है। अंतर सिंह दरबार महू, दीपक भूरिया झाबुआ, प्रेमचंद्र गुड्डू आलोट, नासिर इस्लाम भोपाल उत्तर, आप उम्मीदवार नरेला क्षेत्र से रईसा मलिक कांगे्रस प्रत्याशी शुक्ला को तो नुकसान पहुंचाएंगी ही, साथ ही साथ विश्वास सारंग के भी मुस्लिम वोट काटेंगी। वहीं आरिफ मसूद से नाराज रईसा मलिक कांगे्रस को मध्य विस क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाएंगी, जिसका पूरा फायदा भाजपा प्रत्याशी धु्रवनारायण सिंह को मिलेगा। विवेक यादव उज्जैन उत्तर भी कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। पार्टी इन्हें मनाने में जुटी है, क्योंकि वह यह अच्छी तरह से जानती है कि इन्होंने यदि चुनाव लड़ा तो वोटों के बंटवारे से नुकसान हो सकता है।
पिछले चुनाव में बागियों ने भाजपा-कांग्रेस को पहुंचाया था नुकसान
2018 के विधानसभा चुनाव में बागियों ने भाजपा और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया था। भाजपा सरकार में मंत्री रहे डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया निर्दलीय दमोह और पथरिया से चुनाव लड़े थे। दमोह में उन्हें 1,131 मत मिले और भाजपा के जयंत मलैया 798 मतों से पराजित हो गए। इसी तरह पथरिया में कुसमारिया को 8,755 मत मिले और भाजपा के लखन पटेल 2,205 मतों से हार गए। ग्वालियर दक्षिण में भाजपा से बागी होकर समीक्षा गुप्ता ने चुनाव लड़ा और उन्हें 30 हजार 745 वोट मिले।
कांग्रेस के प्रवीण पाठक 121 मतों से जीत गए। पोहरी में कैलाश कुशवाह ने बसपा से चुनाव लड़ा और 52 हजार 736 वोट मिले। यहां भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंच गई और प्रहलाद लोधी हार गए। भिंड में नरेंद्र सिंह को टिकट नहीं मिली तो वे समाजवादी पार्टी से लड़े और 30474 लिए और भाजपा को तीसरे और कांग्रेस को चौथे नंबर पर पहुंचा दिया।
इसी तरह महेश्वर से राजकुमार मेव, थांदला से दिलीप सिंह कटारा, बदनावर राजेश अग्रवाल और सिहावल से विश्वमित्र पाठक ने चुनाव लडक़र भाजपा को नुकसान पहुंचाया। वहीं, कांग्रेस में झाबुआ से बागी होकर जेवियर मेड़ा खड़े हो गए। उन्होंने 35 हजार 943 मत लेकर डा. विक्रांत भूरिया की हार सुनिश्चित कर दी थी।
ग्वालियर ग्रामीण में साहब सिंह गुर्जर ने 49 हजार 516, बुरहानपुर में सुरेंद्र सिंह शेरा ने 98 हजार 561, पंधाना में रूपाली बारे ने 25 हजार 456, भगवानपुरा में केदार डाबर ने 73 हजार 758, उज्जैन दक्षिण में जयसिंह दरबार ने 19 हजार 560 और वारासिवनी से प्रदीप जायसवाल ने 57 हजार 793 वोट लेकर कांग्रेस की हार तय की। इनमें से सुरेंद्र सिंह शेरा, केदार डाबर और प्रदीप जायसवाल तो चुनाव भी जीते।