TIO जैसलमेर/जोधपुर

आज सुबह 2 और मरीजों की हालत बिगड़ी है। इन्हें भी वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है। भाटी ने डीएनए सैंपल में परिवारों को हो रही परेशानी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में वेरिफिकेशन के कारण थोड़ा समय लगता है।
इस अग्निकांड में अब तक 20 लोगों की मौत हुई है। शवों की पहचान के लिए जोधपुर और जैसलमेर के हॉस्पिटल में परिवारों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।
बुधवार सुबह हादसे का शिकार सेना के जवान के परिवार ने प्रोसेस को लेकर नाराजगी जताई थी। जोधपुर के एक परिवार ने भी परेशान करने का आरोप लगाया था।
दरअसल, मंगलवार दोपहर 3.30 बजे जैसलमेर से जोधपुर जा रही एसी स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे के 18 घंटे बीतने के बाद भी शवों की पहचान नहीं हो सकी है।
हादसे की भयावहता दिखाने वाला PHOTO

अब पढ़िए- अग्निकांड के बड़े अपडेट
1. बस में पटाखे होने का अंदेशा: स्लीपर बस में आग लगने के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे है। सबसे पहले बस में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद एसी का कम्प्रेशर पाइप फटने से आग लगने का दावा था। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की डिग्गी पटाखों से भरी थी, इस कारण आग भड़की।
2. मृतकों को 2 लाख, घायलों को 50 हजार की मदद: जैसलमेर बस हादसे में प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। पीएम नरेंद्र मोदी ने X पर पोस्ट की है, जिसमें लिखा- राजस्थान के जैसलमेर में हुई दुर्घटना से हुई जान-माल की हानि से मन व्यथित है।
3. मंत्री बोले- कुछ लोग खाक हो गए: गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया- पीछे से धमाके की आवाज आई। हमें लग रहा है एसी का कंप्रेशर फट गया। गैस और डीजल के साथ मिलकर बहुत भीषण आग लगी। एक ही दरवाजा था। इसलिए लोग फंस गए। आगे की सीट वाले निकल गए। बस से जो बॉडी निकाली जा सकीं, आर्मी ने निकाल लीं। जो बिल्कुल ही खाक हो गए, उनका कहा नहीं जा सकता।
अब देखिए- हादसे की PHOTOS…





डॉक्टर बोले-5 घायलों की हालत गंभीर
डॉ. फतेह सिंह भाटी ने बताया- मंगलवार को 16 घायल रेफर हुए थे,जिनमें से एक ही रास्ते में मौत हो गई और 15 को यहां भर्ती किया गया था।
3 घायल की हालत गंभीर है, उन्हें वेंटिलेटर पर लेना पड़ा। दो लोगों को सुबह वेंटिलेटर पर लिया गया।
ऐसे में कुल 5 लोग वेंटिलेटर पर हैं, जिनकी स्थिति काफी क्रिटिकल है। बाकी बचे हुए 10 में से तीन-चार घायलों की हालत ठीक हैं।
अधीक्षक बोले-शवों की पहचान में लग सकते हैं 24 घंटे
महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर फतेह सिंह भाटी ने बताया- डीएनए सैंपलिंग में डॉक्टर के साथ-साथ एफएसएल और पुलिस की टीम भी होती है।
ऐसे में थोड़ा समय लगता है। हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में 12 डेड बॉडी रखने की ही क्षमता है।
ऐसे में जोधपुर एम्स, व्यास मेडिकल कॉलेज और जीत मेडिकल कॉलेज से संपर्क किया गया था।
महात्मा गांधी हॉस्पिटल में आज सुबह 9 डेड बॉडी लाई गई है। एक घायल कि मंगलवार को मौत हो गई थी, ऐसे में यहां 10 डेड बॉडी है।
वहीं, 10 डेड बॉडी एम्स में है। मृतकों के डीएनए सैंपल जैसलमेर में लिए जा चुके हैं।
यहां परिजनों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके बाद इनका मिलान किया जाएगा।
हमारा प्रयास है कि अधिकतम 24 घंटे के अंदर यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में एडमिट हैं घायल
जैसलमेर से जोधपुर भेजे गए 10 सैंपल
जैसलमेर के CMHO डॉ. राजेन्द्र पालीवाल ने बताया कि मंंगलवार देर रात से बुधवार सुबह तक करीब 10 परिजनों के DNA सैंपल लेकर जोधपुर भेजे गए हैं। आज जवाहिर हॉस्पिटल में सैंपल लिए जा रहे हैं।
सेना जवान के परिवार की पहचान में परेशानी
हादसे में जान गंवाने वाले जवान महेंद्र मेघवाल, पत्नी पार्वती, बेटी खुशबू, दीक्षा और बेटा शौर्य इनके संभावित शवों की पहचान को लेकर उलझन की स्थिति नजर आ रही है।
इसका कारण है ब्लड रिलेशन का नियम। महेंद्र का सगा एक भाई है जो कि विदेश में रहता है।
जबकि एक बहन है। एमजीएच सूत्रों के अनुसार महेंद्र के सीधे ब्लड रिलेशन में किसी के मौजूद नहीं होने की स्थिति में उनकी पत्नी के पीहर पक्ष से सैंपलिंग की जा सकती है।
इसके बाद पत्नी से तीनों बच्चों की और बच्चों की डीएनए सैंपलिंग से इन बच्चों के पिता की सैंपलिंग से जांच करना भी संभव है।
बस में पैसेंजर्स की संख्या अब भी कंफर्म नहीं
जैसलमेर कोतवाली पुलिस बुकिंग एजेंट लक्ष्मण से पैसेंजर्स की संख्या को लेकर पूछताछ कर रही है।
उसने अब तक बताया कि गडीसर सर्किल पर लक्ष्मण बुकिंग करके उतर गया था, तब बस में 30 यात्री सवार थे।
इसके बाद डीआरडीओ से जवान महेंद्र मेघवाल अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ चढ़ा था।
इस तरह 35 यात्री बस में सवार थे। उसके बाद कितने यात्री बस में सवार हुए, इसको लेकर जांच-पड़ताल जारी है।
डीएनए सैंपलिंग में देरी से परिवार नाराज
जैसलमेर बस हादसे में जोधपुर निवासी जितेश चौहान की भी मौत हुई है।
वे जोधपुर के नेहरू नगर के रहने वाले थे और जैसलमेर सोलर प्लांट में काम करते थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा, एक बेटी है।
परिवार डीएनए सैंपल देने के लिए आज सुबह करीब 7:30 बजे महात्मा गांधी हॉस्पिटल पहुंच गया था।
लेकिन अभी तक सैंपल नहीं लिए जाने से परिजनों में आक्रोश है। जितेश के चचेरे भाई अमरचंद ने बताया कि अभी तक सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
जिससे वह परेशान हो रहे हैं। उन्हें घर में बच्चों और परिवार को भी संभालना है।
जैसलमेर बस हादसे पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर जैसलमेर हादसे में मौत के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है।
जूली ने कहा उन्होंने जैसलमेर कलेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का फोन तक नहीं उठाया गया।
आरोप लगाया कि प्रदेश में टैंकर हादसे से लेकर SMS अस्पताल तक, लगातार हो रही दुर्घटनाएं सरकार की नाकामी को उजागर कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार हर बार जिम्मेदारी तय करने के बजाय आंकड़े छिपाने और लापरवाही ढंकने में लग जाती है।
जोधपुर और जैसलमेर के हॉस्पिटल में लिए जा रहे हैं सैंपल
मृतकों की पहचान के लिए उनके दो निकटतम परिजनों से डीएनए सैंपल लिए जाएंगे।
इसके लिए जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के कॉटेज संख्या 4 और 5 में और जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में विशेष व्यवस्था की गई है।
इस प्रक्रिया के लिए अजमेर और बीकानेर से भी टीमें बुलाई गई हैं।

चश्मदीद बोला-आग लगते ही भाग गया था ड्राइवर
जैसलमेर हादसे के एक चश्मदीद हजार सिंह ने बताया कि सबसे पहले धमाके की आवाज आई। हमें लगा कि पास में आर्मी एरिया है तो वहां कुछ हुआ होगा, लेकिन फिर देखा आग लगी है। पास पहुंचे तो जलती बस से लोग कूद रहे थे। वहीं, बस का ड्राइवर जलती बस को छोड़कर भाग रहा था।
सीएम भजनलाल ने घायलों से की मुलाकात
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को जैसलमेर के बाद जोधपुर पहुंचे। यहां उन्होंने महात्मा गांधी हॉस्पिटल में घायलों से मुलाकात की। सीएम ने हॉस्पिटल के डॉक्टर्स से भी घायलों की हालत को लेकर जानकारी ली।

11 नवंबर को शादी, प्री-वेडिंग शूट के लिए गया था कपल
जोधपुर हॉस्पिटल में एडमिट एक घायल आशीष दवे के परिवार ने बताया कि वो अपनी मंगेतर के साथ जैसलमेर प्री-वेडिंग शूट के लिए गया था।
उनकी 11 नवंबर को शादी है। दोनों बस के अगले हिस्से में बैठे थे, इसलिए हादसे के कुछ मिनटों बाद ही दोनों बाहर आ गए थे। हालांकि, आशीष को फिलहाल देखने में परेशानी हो रही है।
स्लीपर बस अपने चौथे फेरे में जली
केके ट्रैवल्स की जिस स्लीपर बस में आग लगी उसका रजिस्ट्रेशन एक अक्टूबर को हुए था।
इस बस को 9 अक्टूबर को ऑल इंडिया परमिट मिला था। मंगलवार को इसका महज चौथ ट्रिप था, लेकिन ये जलकर खाक हो गई।
जैसलमेर से मंगलवार दोपहर बाद जब ये बस निकली, तब उसमें 40 सवारियां थीं। रास्ते में से और भी सवारियां बस में बैठी थीं।
बस मॉडिफाइड थी, न इमरजेंसी गेट और न विंडाे हैमर
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिस बस में हादसा हुआ वो एकदम नयी थी। इसके बाद भी उसमें न कोई इमरजेंसी गेट था और न ही विंडो तोड़ने वाले हैमर थे। इसलिए ज्यादातर लोग बाहर ही नहीं निकल सके। कई डेडबॉडी एक-दूसरे के ऊपर भी चिपकी हुई मिली हैं।
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर घायलों को जोधपुर लाए
हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 16 लोगों को घटनास्थल से जोधपुर तक करीब 275 किमी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर लाया गया। ज्यादातर यात्री 70 प्रतिशत तक झुलस गए थे। एक बुजुर्ग की रास्ते में ही मौत हो गई।
बिलखते परिजन अपनों को ढूंढ रहे
घायलों के परिजन भी एमजीएच हॉस्पिटल पहुंचने लगे हैं। रोते-बिलखते परिजन हॉस्पिटल में अपनों को ढूंढते नजर आए।
जैसलमेर से आने वाली हर एम्बुलेंस के लिए जोधपुर के एमजीएस हॉस्पिटल में पुलिस की अलग-अलग टीम तैनात की गई थी।

धमाके की आवाज आई, एक तरफ 10 से 12 लाशें पड़ी थीं
प्रत्यक्षदर्शी कोजराज सिंह ने बताया- मैं अपने फॉर्म हाउस पर था। धमाके की आवाज सुनाई दी।
फिर आग की लपटें दिखाई दी। मैंने तुरंत 108 पर फोन किया। एम्बुलेंस, फायर बिग्रेड जल्दी भेजने को कहा।
सदर थाना को फोन कर घटना के बारे में बताया। मैं कुछ लोगों के साथ घटनास्थल के पास पहुंचा तो बस रुकते ही 10 से 12 लोग बुरी हालत में जलती बस के आसपास पड़े हुए थे।
बस में कोई चीख-चिल्लाहट नहीं हो रही थी। बस के गेट पर जाकर देखा तो उसमें लाशों का ढेर था।
एक तरफ 10 से 12 लाशें पड़ी थी, पीछे की तरफ जली हुई लाशें पड़ी थीं।

जैसलमेर से सभी 19 शवों को जोधपुर भिजवाया
इस हादसे में मृतक जैसलमेर से 19 सभी शवों को जोधपुर भिजवाया गया है।
कलेक्टर प्रताप सिंह ने बताया कि मृतकों की पहचान हेतु उनके दो निकटतम परिजनों के DNA सैंपल लिए जा रहे हैं।
इसके लिए जवाहर अस्पताल, जैसलमेर के ट्रॉमा सेंटर में विशेष व्यवस्था की गई है।

घायल की मां बोली- बस में लपटें उठ रही थीं, ड्राइवर फिर भी नहीं रुका
जोधपुर के गंगाना निवासी सैफू खा ने बताया कि उनके ममेरे भाई इकबाल खान और उनके बहनोई फिरोज खान दोनों ही बस हादसे में घायल हो गए।
दोनों को जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में लाया गया है। दोनों की स्थिति सामान्य है।
इधर, इस हादसे में घायल हुए आशीष की मां देर रात जब जोधपुर सीएम पहुंचे तो वे भी वहां मौजूद थी।
हालांकि पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। मां बार-बार ये ही कहती रही कि इस मामले में बस वाले की गलती थी। वह आग लगने के बाद भी 800 मीटर तक दौड़ाता रहा।
पति-पत्नी समेत पूरे परिवार की मौत
हादसे में महेंद्र मेघवाल के पूरे परिवार की मौत हो गई। परिवार में महेंद्र समेत उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा शामिल थे।
सभी की जिंदा जलने से जान चली गई। महेंद्र जोधपुर के बालेसर के लावारान शेतरावा के रहने वाले थे।
वे फिलहाल जैसलमेर के इंद्रा कॉलोनी में किराया पर रहते थे। वे गोला बारूद डिपो में पोस्टेड थे।


