2025 को बेमतब में क्यों याद करना

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 शशी कुमार केसवानी


आप 2025 को बेकार में क्यों याद करेंगे ऐसा क्या हो गया 2025 में वैसे भी 2025 साल बहुत अच्छा नहीं रहा। इसलिए नहीं कि कई सरकारी योजनाएं फेल हो गई। बड़ी-बड़ी हेडलाइन छपी टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज चल गई। पर नतीजा कुछ नहीं निकला। लोगों को इंटर्नशिप तक नहीं मिली। इसलिए भी याद नहीं किया जाएगा क्योंकि डालर 91 रुपए का और सोना और चांदी इतना महंगा हो गया कि लोग शादी में कम खरा सोना और कम खरी चांदी गिफ्ट करने लगे। 2025 में मीडिल क्लास गरीबों जैसी जिंदगी जी रहा है। टैक्स अलग-अलग तरीको से दे रहा है, दिए जा रहा है। फिर भी परेशान है। वैसे कहुं तो 2025 के साल में कुछ ऐसा था भी नहीं जिस पर कुछ बात की जा सके। बस लोग थके हारे से हो गए है जम्हाईयां ले रहे है थोड़े उदास से हो गए है। करने को कुछ खास है नहीं। 2025 में अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान हादसे की अभी तक जांच की कोई रिपोर्ट आई नहीं। संसद में जवाल जवाब पर कहा गया कि अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर जांच होने में समय लगेगा। यानि दूसरे शब्दों में कहे तो मामला ठंडे बस्ते में ही रह गया। विपक्ष सरकार से उनकी उपलब्धियां गिनवाने के लिए जोर बनाता रहा। पर 20 साल की उपलब्धियां न सरकार बता सकी और न संघ अपने सौ साल का इतिहास बता सका। उल्टा वंदे भारत पर संसद में बहस करके आरएसएस को कटघरे में खड़ा कर दिया कि कौन सा संघ का आदमी वंदे मातरम् का नारा लगाकर जेल गया था। कोई भी नहीं बता सका। भाजपा ने सरकारे बनाई है उन सरकारों की क्या हालत है वो भी जगजाहिर है। अगर सरकारों का काम काम अच्छा होता तो प्रसार भारती को कर्ली मेडम को 6 करोड़ रुपये देकर सड़कों और विकास के ऊपर वीडियों बनाने के लिए दिए गए। एक इन्फलुएंसर को इतने पैसे दिए जाने पर कई गोदी मीडिया वाले लगभग बेहोश होने की हालत में आ गए थे। उनके हाथ से ये बिजनेस का अवसर कैसी निकला गया। इसलिए बार-बार कह रहा हूं 2025 को भूलना ही बेहतर है। पहलगाव में हमला हुआ भारत में भी हमला किया पर नतीजे पर सवाल खड़े हो गए। देशभर में हादसों का एक दौर आ गया जो अभी तक खत्म नहीं हुआ। हवा प्रदूषित हो गई। सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। सरकार अपनी रफ्तार से आगे चल रही है। इंडिगो ने लोगों को पैदल चला दिया अमेरिका ने टैरिफ लाद दिया। सरकार ने लाल आंख नहीं दिखाई। चुनाव आयोग घटिया शायरी सुनाकर अपनी बात कहता रहा। विपक्ष वोट चोरी का इल्जाम लगाता रहा। सबूत देता रहा। 2025 में जितने भ्रष्ट जज सामने आए उतने पहले कभी कल्पना भी नहीं की थी। उपराष्ट्रपति अचानक इस्तीफा देकर गायब हो गए। विपक्ष उन्हें फेयरवेल देना चाहते थे वो भी न हो सका। जाकीर हुसैन के जाने का सबको अफसोस हुआ पर धर्मेन्द्र के जाने की झूठी खबरों से देश और परिवार आहत हुआ। मेरा मतलब ये नहीं कि आप नया साल न मनाए आप खूब पार्टी करें एंजाय करें पर 2025 की शादी की पार्टियों का अंदाज भी बदल गया है सारे फ्रूट कटके सलाद की श्रेणियों में आ गए है। कट कट कर टेबिल पर सज गए है। वैसे भी ये सारी चीजे बुजुर्ग ही खाते है। युवा तो पी पी कर नाचते ही रहते है। दुल्हा दुल्हन एक दिन के लिए सम्राट और महारानी बन जाते है। चाहे ये कर्ज लेकर ही शानौ शौकत दिखाई जाए। अब आपको भी झूठे सपने देखने और दिखाने की आदत हो गई है। जो सपने आपने 2025 में देखे हैं वहीं सपने 2026 में देखेंगे क्योंकि खुद को धोखे में रखने की आदत हो गई है। 10, 000/- हर अकाउंट में आएंगे चाहे देख कर्ज में डूबता जाए। 15 लाख आते आते ब्लैक से व्हाइट मनी बन गए किसी को पता न चला। ऐसे ही सुनहरे सपने आप दिन में भी देखे उस पर कोई जीएसटी भी नहीं है और कोई भी सरकारी टैक्स नहीं लगता। आपको अब सपनो के सहारे ही जीना है क्योंकि आप अपनो को धीरे-धीरे खोते जा रहे है। अब शादियों में जिस तरह से परंपरागत व्यंजन नहीं होते वहां पिज्जा, मोमोज और पास्ता का राज चलता है। 2025 में नेहरु खूब चले उम्मीद है आगे भी चलेंगे। अगर आप सोच रहे है आने वाला साल 2026 कोई सुनहरा बदलाव लेकर आएगा तो ये एक केवल सपना ही रहेगा कोई भी व्यवस्था ठीक नहीं होनी और ना ही कोई बदलाव होना है यहंी सब होगा और हो सकता है और भयावह हो। मैं सोचता हूं मैं अपना कहा गलत होता देखू तो ज्यादा खुशी होगी। यही कामना करता हूं युवाओ को नौकरी मिले। संयुक्त परिवार रहे। सरकार और जनता के बीच अच्छा सामंजस्य रहे। देश की सारी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाए। मेरे पास तो जादू की कोई छड़ी नहीं है जो ठीक कर सकूं । वो तो हमारा रिंग मास्टर ही कर सकता है। फिर भी नए साल की आकाशभर बधाई। आप स्वस्थ रहे और 2026 आपके लिए खुशखबरियां लाता रहे।