नई दिल्ली। दिल्ली-एनसआर में हवा की गुणवत्ता का गिरना बुधवार को भी जारी रहा। परेशान करने वाली बात यह है कि बुधवार को इसने इस सीजन के सबसे खराब स्तर को भी छू लिया। नासा की ताजा तस्वीरों में पराली का धुआं साफ दिख रहा है। इस धुएं की वजह से प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। पलूशन विभाग ने बताया कि बुधवार को देश के उत्तरी इलाकों में खतरे का लाल निशान भी नजर आया।
The quality of air and poorness in Delhi, showing the red mark of danger
सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड ने एयर क्वॉलिटी इंडेक्स को 313 पर रखा और पीएम 2.5 और पीएम 10 में बढ़त दर्ज हुई। इसके अलावा कम हवा गति की वजह से पुराली जलने से देश के उत्तरी मैदानी इलाकों में लाल निशान भी पहली बार नजर आए। पलूशन बोर्ड का कहना है कि आने वाले दिनों स्थिति और भी खराब हो सकती है।
ग्रेडेड रेस्पॉन्स ऐक्शन प्लान (जीआरएपी) को लागू कराने वाली इन्वाइरनमेंट पलूशन अथॉरिटी (ईपीसीए) ने कहा कि प्रदूषण के ‘बेहद खराब’ स्तर का सामना करने के लिए कदम पहले उठा लिए गए हैं, सिर्फ पार्किंग फीस बढ़ाने जैसे कदम नहीं उठाए गए हैं। ईपीसीए की सदस्य और सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायण ने कहा, ‘हम स्थिति पर बेहद करीब से नजर रखे हुए हैं। हम पार्किंग चार्ज में बढ़ोतरी नहीं करेंगे क्योंकि पार्किंग पॉलिसी नहीं होने की स्थिति में इसे लागू करना मुश्किल हो जाएगा। दूसरे कदम उठाए जा चुके हैं, उन्हें सिर्फ जमीनी स्तर पर लागू करना बाकी है। हमने दूसरी संस्थाओं को भी कहा है कि वे अपनी कार्रवाई और सख्त करें।’
नासा द्वारा जारी तस्वीर में दिखा ‘लाल निशान’
दिल्ली की एयर क्वॉलिटी मंगलवार को 291 से बढ़कर बुधवार को 313 पर आ गई। सिस्टम आॅफ एयर क्वॉलिटी ऐंड वेदर फोरकास्ट ऐंड रिसर्च (सफर) अगले तीन दिनों में इसकी गुणवत्ता और खराब हो सकती है। 201 से 300 तक की क्वॉलिटी खराब मानी जाती है, 301 से 400 तक बेहद खराब और 400 से ऊपर की मीटर रीडिंग को ‘गंभीर’ माना जाता है। सफर के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर गुफरान बेग ने कहा, ‘प्रदूषण हवा की गति कम होने और स्थानीय कारणों से बढ़ा है। तापमान भी गिर रहा है। पुराली जलाना भी इसका एक कारण है। फोरकास्ट सिस्टम के मुताबिक, अगले तीन दिनों में तापमान और कम होने और हवा की गति कम होने की वजह से प्रदूषण और बढ़ सकता है।’
गैस चेंबर बन जाएगा दिल्ली
नासा की ताजा तस्वीरों में पराली का धुआं साफ दिख रहा है। इस धुएं की वजह से प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने कहा कि अगर इसे जल्द ही रोका नहीं गया तो पूरा नॉर्थ इंडिया गैस चैंबर में बदल जाएगा। दिल्ली का एयर इंडेक्स बुधवार को बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य के लिए पराली जलाने से रोकना काफी जरूरी है। जबकि राज्य सरकारें अब भी इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही हैं। दिल्ली में ॠफअढ को लागू कर दिया गया है, ताकि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से बचाया जा सके।
जीआरएपी लागू करने में दिक्कत
सीजन में पहली बार एयर इंडेक्स 313 दर्ज हुआ, जो बेहद खराब श्रेणी में शामिल है। वहीं, दूसरा साल होने के बावजूद जीआरएपी को पूरी तरह लागू करने में दिल्ली-एनसीआर नाकाम दिख रहे हैं। एनसीआर को डीजल जेनसेट के प्रयोग पर छूट देने के बाद अब दिल्ली-एनसीआर को पार्किंग फीस बढ़ाने से भी छूट मिल गई है। बेहद खराब स्तर पर प्रदूषण होने पर यह नियम उठाया जाता है, ताकि लोग अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। ईपीसीए से मिली जानकारी के अनुसार, पार्किंग पॉलिसी के अभाव में इस बार यह नियम दिल्ली-एनसीआर में लागू नहीं होगा। पिछले साल इस नियम को लागू किया गया था। लेकिन काफी कमियां मिलने के बाद इसे रोकना पड़ा था।
पिछले साल भी था यही हाल
प्रदूषण की गिरफ्त में आ रही दिल्ली ने पिछले साल भी पहला बेहद खराब स्तर का प्रदूषण 17 अक्टूबर को ही झेला था। इस बार भी पराली की वजह से यह प्रदूषित दिन इसी दिन से शुरू हुए हैं। सफर की एडवाइजरी के मुताबिक इस तरह की हवा में सुबह शाम बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि अस्थमा या सांस की बीमारी है तो अपनी दवाइंया साथ रखें। कमरे के दरवाजें, खिड़कियां बंद रखें। कमरे में झाड़ू लगाने की बजाय गीले कपड़े से साफ करें। एन-95 या पी-100 मास्क का प्रयोग करें। जॉगिंग की जगह धूप निकलने के बाद शॉर्ट वॉक पर जाएं। इस बार हालात इसलिए भी खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि पिछले साल दिवाली अक्टूबर में आई थी।

