मी टू: मंत्री से इस्तीफे के बाद भी अकबर कम नहीं हुई मुश्किलें, जाएगी राज्यसभा की सीट?

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भोपाल। महिला पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार और यौन शोषण के आरोपों से घिरे एम. जे. अकबर ने भले ही चौतरफा दबाव के बाद केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन उनकी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब चर्चा है कि मध्य प्रदेश के कुछ बीजेपी नेता चाहते हैं कि अकबर को राज्यसभा से इस्तीफा देने को कहा जाए।
Me: Even after the resignation of the minister, Akbar will not be less, will the seat of the Rajya Sabha?
दरअसल, एमजे अकबर मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा सांसद हैं। वहां 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी किसी भी हाल में चुनावी माहौल के देखते हुए कोई खतरा लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में प्रदेश बीजेपी के कुछ नेता पार्टी आलाकमान पर अकबर से राज्यसभा सीट वापस लेने का दबाव बनाने लगे हैं। हालांकि, ये नेता मीडिया के सामने आने को तैयार नही हैं। लेकिन वे यह साफ कह रहे हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। बीजेपी में शामिल होने के बाद अकबर को 2016 में राज्यसभा भेजा गया था। अकबर के अलावा, मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य धर्मेंद्र प्रधान भी मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा सदस्य हैं।

‘बीजेपी के लिए समस्या बने अकबर’
पिछले कुछ दिनों से अकबर पर उनके साथ काम कर चुकीं कई महिला पत्रकारों ने अनुचित व्यवहार और यौन शोषण के आरोप लगाए थे। अकबर ने अपने ऊपर लगे आरोप को पूरी तरह से झूठ करार दिया था और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकारों में से एक प्रिया रमानी के खिलाफ सोमवार को आपराधिक मानहानि का मुकदमा कर दिया था। हालांकि, रमानी के समर्थन में 20 महिला पत्रकार सामने आ गईं। इसी के बाद अकबर पर मंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया था। आखिरकर बुधवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे भी दिया।

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता से जब उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। गोपनीयता की शर्त पर उन्होंने कहा कि पार्टी को यह कदम उसी दिन उठाना चाहिए था, जिस दिन प्रिया रमानी ने अकबर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया था। हम तो चाहते हैं कि नेतृत्व अब उनसे राज्यसभा की सीट भी वापस ले ले। वह पार्टी के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। उनसे पार्टी को फायदा कम, नुकसान ज्यादा हुआ है।

शिवराज सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना था कि अकबर से तो मुक्ति ले ही लेनी चाहिए। वक्त आ गया है कि पार्टी आलाकमान बाहरी नेताओं की जगह प्रदेश की नेताओं को तरजीह दे।