नई दिल्ली। बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना में तीन दशक लंबा इंतजार आज खत्म होने जा रहा है। के9 वज्र और एम777 होवित्जर तोपों के शामिल होने से सेना की ताकत और बढ़ जाएगी। पाकिस्तान और चीन सीमा पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए इन तोपों की महत्ता और भी बढ़ जाती है। करगिल युद्ध के समय भी काफी ऊंचाई पर बैठे दुश्मन को निशाना बनाने के लिए ज्यादा दमदार तोपों की जरूरत महसूस की गई थी।
After three decades long wait, the army will join 9 and M777, and will increase strength
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नासिक के देवलाली तोपखाने केंद्र पर के9 वज्र और एम777 होवित्जर तोपों को शामिल करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। रक्षा मंत्री ने आज सुबह ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि आज 155एमएम, एम777 ए2 अल्ट्रा लाइट होवित्जर आधुनिक गन सिस्टम्स को सेना में शामिल किया जाएगा। इस मीडियम तोप को आसानी से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है।
देवलाली में आयोजित समारोह में आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि के9 वज्र को 4,366 करोड़ रुपये की लागत से शामिल किया जा रहा है। यह कार्य नवंबर 2020 तक पूरा होगा। कुल 100 तोपों में 10 तोपों की पहली खेप की आपूर्ति इस महीने की जाएगी।
के9 की खासियत
इस तोप की रेंज 28-38 किमी है। यह 30 सेकंड में तीन गोले दागने में सक्षम है। तीन मिनट में यह तोप 15 गोले दाग सकती है। 40 के9 वज्र तोपें नवंबर 2019 में और फिर 50 तोपों की आपूर्ति नवंबर 2020 में की जाएगी। के9 वज्र की प्रथम रेजिमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है। यह ऐसी पहली तोप है जिसे भारतीय प्राइवेट सेक्टर ने बनाया है।
दमदार एम777 होवित्जर तोप
यह दमदार तोप 30 किमी की दूरी तक वार कर सकती है। इसे हेलिकॉप्टर या प्लेन के जरिए आवश्यकतानुसार जगह पर ले जाया जा सकता है। थल सेना ट777 होवित्जर की सात रेजिमेंट बनाने जा रही है। इस समय 52 कैलिबर की ट777 तोप का इस्तेमाल अमेरिका, कनाडा, आॅस्ट्रेलिया और अब भारत की सेना करेगी। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी। प्रथम रेजिमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी।

