मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव: भाजपा-कांग्रेस के लिए बागी खड़ी कर सकते हैं मुसीबत

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भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को बागियों का सामना करना पड़ रहा है। नामांकन वापसी तक ये बागी नहीं मानें तो पार्टी के प्रत्याशियों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। भाजपा की ओर से तीन पूर्व मंत्री राघवजी ने विदिशा से, रामकृष्ण कुसमारिया ने दमोह और पथरिया व केएल अग्रवाल ने बमोरी से नामांकन पत्र दाखिल किया है।
Madhya Pradesh Assembly elections: BJP-Congress may create rebellion trouble
सिवनी मालवा विधायक सरताज सिंह ने होशंगाबाद, नरेंद्र सिंह कुशवाह ने भिण्ड, संगीता चारेल ने सैलाना, शांतिलाल बिलबाल ने झाबुआ और कमल मर्सकोले ने बरघाट विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है। इसी तरह कटनी नगर निगम के अध्यक्ष संतोष शुक्ला, भाजयुमो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष धीरज पटेरिया, सीहोर से पूर्व विधायक रमेश सक्सेना, पूर्व विधायक रमेश खटीक ने करैरा से, पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामोराम गुप्ता ने सतना से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र भर दिए हैं।

गौर ने बिगाड़ा माहौल
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और पूर्व मंत्री सरताज सिंह के रूख ने भाजपा में बागियों के लिए नया रास्ता खोल दिया है। गौर ने दबाव डालकर बहू कृष्णा गौर के लिए टिकट पा लिया तो सरताज कांग्रेसी हो गए। दोनों नेताओं के रूख से भाजपा में बागियों की संख्या काफी बढ़ गई।

कई ने इस्तीफा दिया
बरघाट विधायक कमल मर्सकोले का टिकट काटे जाने के विरोध में भाजपा समर्थित जनपद पंचायत अध्यक्ष बरघाट सुनील टेकाम, उपाध्यक्ष तोमेश रहांगडाले, जनपद पंचायत कुरई के अध्यक्ष देवेंद्र रहांगडाले, पूर्व जिला महामंत्री दिग्विजय सिंह राजपूत ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

सतना जिले में सांसद गणेश सिंह से प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और अनूपपुर जिले के संगठन प्रभारी अरुण द्विवेदी ने पार्टी की सदस्यता छोड़ दी। वहीं, सतना जिला पंचायत की उपाध्यक्ष डॉ. रश्मि पटेल ने भी पार्टी छोड़कर सतना से निर्दलीय फॉर्म भर दिया। जिला पंचायत सतना के अध्यक्ष गगनेंद्र प्रताप सिंह भी पार्टी से नाराज हैं।