बाखबर
राघवेंद्र सिंह
चुनाव में रोज कुछ न कुछ अच्छी-बुरी खबरें सियासी पार्टियों को मिल रही है। कांग्रेस के वचन पत्र को लेकर भाजपा ने जो छिद्रानुवेषण किया है उसके मुताबिक संघ की शाखा को लेकर सेल्फ गोल मार लिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस साफ-सफाई का दौर भी शुरू कर दिया है इसमें स्पष्ट किया है कि संघ पर रोक नहीं बल्कि शासकीय कैंपस में शाखा लगाये जाने को बैन करने की बात की है। बहरहाल चुनाव में तू डाल-डाल तो मैं पात-पात का खेल अभी और ऊंचाईयों को छुएगा।
Snakes in the nape and sleeves in the neck of the organization
म यहां बात कर रहे हैं इसके अलग हट के भाजपा कांग्रेस के संगठन की शक्ति पर। मजबूत संगठन वाली भाजपा कई मामलों में कांग्रेस से कमजोर नजर आ रही है। हालत यह है कि जहां शिव के गले में नाग डले रहते हैं वैसे ही भाजपा के संगठन के गले में नाग और उसकी आस्तीनों में सांप पले नजर आ रहे हैं। श्रेष्ठ संगठन वाली भाजपा की ऐसी दुर्गति पहले कभी शायद ही देखी गई हो।
भाजपा की हालत ये है कि डैमेज कंट्रोल के मामले में संगठन के दिग्गज कमजोर साबित हो रहे हैं। जबकि पहले कभी भाजपा के नेता अपने नाराज लोगों को मनाने में मास्टर माने जाते थे। शिवराज मंत्रिमंडल में बुन्देलखंड की बड़ी नेता कुसुम मेहदेले इस कदर नाराज है कि उन्हें अपनी बात कहने के लिए किसी नेता के कान नहीं मिले बल्कि उन्हें ट्विटर का सहारा लेना पड़ा। और उसमें जो कुछ कहा वह साबित करता है कि भाजपा में जनता और कार्यकर्ता तो छोड़िये अपने बड़े नेताओं से ही संपर्क और संवाद कम हो गया है।
कुसुम मेहदेले अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखती हैं यह कैसा अन्याय है कि पवई से 12 हजार मतों से हारे प्रत्याशी को पन्ना से टिकट और पन्ना से 29 हजार से अधिक मतों से जीते प्रत्याशी का टिकट काटा, क्यों? कैसी पं. दीनदयाल जी और पं. श्यामाचरण जी मुखर्जी की भारतीय जनता पार्टी है, तोमर जी। यहां तोमर जी से मतलब केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से है।
कुसुम मेहदेले बुन्देलखंड क्षेत्र में जनता के बीच जीज्जी के नाम से मशहूर है। जनसंघ से लेकर भाजपा तक उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। लोधी समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण भाजपा ने उन्हें एक समय उमा भारती के बगावत करने के दौरान लोधी नेता के रूप में खड़ा किया था। पार्टी की नीतियों के अनुसार वे 75 पार के फामूर्ले में फंस गई हैं। उनका टिकट कटा इस पर शायद किसी को ऐतराज कम होगा लेकिन पार्टी की जो कमी निकलकर आई है कि वह संवाद और संपर्क के मामले में अपने वरिष्ठ नेताओं की भी अनदेखी कर रही है। कमजोर नेता और लचर संगठन एक बार फिर बेनकाब हुआ है।
भाजपा में जो कुछ हो रहा है उसके लिए पहले कभी कांग्रेस बदनाम हुआ करती थी। संवादहीनता के मामले में कुसुम मेहदेले के अलावा बड़नगर विधानसभा सीट का भी मामला है। यहां पार्टी ने जितेन्द्र पांडे को बी फार्म दे दिया। और बाद में संजय शर्मा को उम्मीदवार बना दिया। इसमें जितेन्द्र का यह कहना है कि बी फार्म देने के बाद यदि पार्टी फैसला बदल रही है तो कम से कम जिसको प्रत्याशी बनाया जा रहा था उसे तो सूचना देनी थी। उनका कहना है खबरें उन्हें मीडिया से मिल रही है।
इसी तरह सरताज सिंह का मसला भी था। उन्हें भरोसे में लिये बिना पार्टी ने टिकट काट दिया। नतीजा यह हुआ कि जिस लीडर को संगठन ने सांसद केन्द्रीय मंत्री, विधायक और फिर राज्य में मंत्री बनाया वही बागी होकर कांग्रेस से मैदान में है। संगठन की कमजोरी के ढेरों किस्सों में इंदौर प्रत्याशियों का चयन भी चौकाने वाला है। यहां जिन उम्मीदवारों को पार्टी ने मैदान में उतारा है उनमें से कुछ तो प्रदेश अध्यक्ष तक को अपने बैनर, पोस्टर में जगह नहीं दे रहे हैं।
कभी शिखर पर रहा संगठन रसातल में जा रहा है। यह भाजपाइयों के लिए कड़वी लग सकती है मगर सच्चाई यही है। कह सकते है शिव के गले में नाग लिपटे रहते हैं। यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और भाजपा संगठन का हाल यह है कि सांप और नाग की जगह गले तो क्या आस्तीनों तक में एनाकोंडा दिख रहे हैं।
कांग्रेस में बुन्देलखंड के सत्यव्रत चतुवेर्दी के बागी होने के कारण प्रदेश कांग्रेस के समन्वयक दिग्विजय सिंह की आंखों में पिछले दिनों लोगों ने आंसू देखे। मगर भाजपा में किसी की आखों में आंसू नजर नहीं आ रहे हैं। लगता है उन्हें क्या अति विश्वास है सरकार में फिर से आने का। इसके साथ उन्हें आदत पड़ गई है कमजोर संगठन की अनदेखी करने की। भाजपा और कांग्रेस में बगावत को नजरअंदाज करने वालों के लिए मशहूर शायर अहमद फराज का एक शेर काफी है :
‘ये बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं फराज,
कच्चा तेरा मकान है कुछ तो खयाल कर’

