कांग्रेस के ‘मुझे गुस्सा आता है’ का भाजपा ने निकाला तोड़, ‘माफ करो महाराज’ जमकर गूंज रहा है गली-गली में

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भोपाल। सियासी फिजा की गर्माहट बढ़ाने में चुनावी नारों और अभियान अहम भूमिका निभाते रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका खासा असर देखने को मिला था जब बीजेपी के कैंपेन ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ और ‘अबकी बार मोदी सरकार’ ने एक बड़े वर्ग को बीजेपी के पक्ष में मोड़ दिया था. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर इसी तरह का अभियान चला कर शिवराज के पक्ष में हवा बनाने की कोशिश कर रही है.
BJP breaks out of ‘I am angry’ of Congress, ‘Sorry Maharaj’ is echoing loudly in the street
‘माफ करो महाराज, हमारा नेता तो शिवराज’ ये वो शब्द हैं जिनकी गूंज मध्यप्रदेश की गली-गली में है. कांग्रेस के ‘मुझे गुस्सा आता है’ अभियान का मुकाबला करने के लिए बीजेपी इस नारे के साथ सियासी समर में अपनी सल्तनत बचाने के लिए उतर चुकी है. खास बात ये कि इस अभियान के तहत चलाए जाने वाले विज्ञापनों की सीरीज में बीजेपी ने दिग्विजय सिंह सरकार को निशाना बनाते हुए शिवराज सिंह के कार्यकाल को बेहतर बताने की कोशिश की है. यानी ये विज्ञापन सत्ता विरोधी लहर से बचने की बीजेपी की उसी रणनीति पर आधारित हैं, जिसके तहत उसने लोगों को दिग्विजय सिंह का वक्त याद दिलाकर खुद को कांग्रेस से अच्छा दिखाने की योजना बनाई थी.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सियासत में धारणा बनाना बेहद महत्वपूर्ण होता है. अगर किसी बात को लेकर लोगों के मन में धारणा बन जाती है तो उसे उनके दिमाग से निकालना आसान नहीं होता. यही वजह है कि बीजेपी या कांग्रेस दोनों के प्रचार अभियानों में इस बात की कोशिश की जा रही है कि किसी तरह लोगों के मन में ये धारणा बिठा दी जाए कि उनकी पार्टी दूसरों से बेहतर है. इसी के तहत कांग्रेस ने सबसे पहले ‘मुझे गुस्सा आता है’ कैंपेन चलाया, जिसके खिलाफ बीजेपी चुनाव आयोग तक चली गई. हालांकि चुनाव आयोग ने बीजेपी की आपत्ति खारिज करते हुए कांग्रेस के कैंपेन को हरी झंडी दे दी.

कांग्रेस के कैंपेन के खिलाफ बीजेपी का चुनाव आयोग तक जाना साफ करता है कि वो बिल्कुल भी नहीं चाहती कि उसके खिलाफ भी उसी तरह से कोई धारणा बन जाए, जैसी उसने खुद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ बनाई थी. यही वजह है कि जब चुनाव आयोग ने इस विज्ञापन को प्रतिबंधित नहीं किया तो इसका जवाब देने के लिए बीजेपी ने ‘माफ करो महाराज, हमारा नेता तो शिवराज’ कैंपेन की शुरूआत की.

भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे ज्यादा तजुर्बा रखने वाली दोनों पार्टियां यानी बीजेपी और कांग्रेस अच्छी तरह जानती हैं कि आम लोगों के बीच बनी धारणा से बचना बेहद मुश्किल होता है. इसीलिए दोनों ही दल एक-दूसरे के खिलाफ धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बहरहाल, सियासी दल किसी भी तरह की धारणा बनाने की कोशिश करें, लेकिन लोकतंत्र में अंतिम धारणा जनता की ही होती है, जिसका खुलासा वो ईवीएम का बटन दबाकर करती है.