योजनाओं को जमीन पर लाने योगी ने विभागों के पेच कसने किए शुरू, कहा- डेट लाइन में करें काम पूरा

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लखनऊ। बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के साथ ही ‘शोकेस’ किए जा सकने वाले बड़े प्रॉजेक्ट भी जल्द जमीन पर उतरें इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागों के पेच कसने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 500 करोड़ से अधिक के प्रॉजेक्ट को तय डेटलाइन पर पूरा करने को कहा है। देरी के चलते जिन प्रॉजेक्ट की लागत बढ़ी हैं, सीएम योगी ने उनकी समीक्षा कर जिम्मेदारी की जवाबदेही भी तय करने को कहा है।
Yogi started fixing the panels of the departments on the ground, said, – In the date line, work is completed
49 परियोजनाएं हैं निमार्णाधीन
प्रदेश में इस समय विभिन्न विभागों की 49 परियोजनाएं निमार्णाधीन हैं, जिनकी लागत 500 करोड़ से अधिक हैं। इसमें ऊर्जा विभाग की 12, अवस्थापना और औद्योगिक विकास की 6, सिंचाई विभाग की 10, आवास और शहरी नियोजन की 3, नगर विकास विभाग की 6, चिकित्सा शिक्षा की 6, लोक निर्माण विभाग की 4, गृह और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की एक-एक योजनाएं हैं।

अखिलेश सरकार में योजनाओं की नींव पड़ी, लेकिन काम नहीं हुआ
इसमें ज्यादातर योजनाएं ऐसी हैं, जिनकी अखिलेश सरकार में नींव तो पड़ गई थी लेकिन या तो उनमें काम आगे नहीं बढ़ा या उनमें देरी के चलते लागत लगातार बढ़ती रही। बिजली विभाग की कुछ योजनाएं तो मायावती के समय से लटकी पड़ी हैं। पिछले दिनों सीएम ने इन सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तलब की थी। कई योजनाओं की उन्होंने डेटलाइन घटा दी है तो कुछ में ज्यादा लागत बढ़ाए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए जांच के भी आदेश दिए हैं।

90% योजनाओं देरी से, बढ़ी लागत
500 करोड़ से अधिक की 90% योजनाएं तय टाइमलाइन से डेढ़ साल से लेकर 10 साल तक टाइम ओवररन हैं। इनके चलते इनकी लागत डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गई है। खासकर बिजली विभाग की अधिकांश योजनाओं में देरी के चलते लागत में काफी बढ़ोतरी हुई। इस तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत बन रहे मेडिकल कॉलेजों की भी मूल लागत योजना में लगातार देरी के चलते दोगुनी तक बढ़ चुकी है।

देरी के चलते बढ़ जाती है लागत
अधिकारियों ने सीएम को सफाई में बताया कि योजना में निर्माण कार्य के लिए समय से पैसा नहीं मिला जिसके चलते देरी हुई और लागत बढ़ती गई। सीएम ने मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए खास तौर पर एक कमिटी बनाने को कहा है जिससे इनका सुचारू संचालन करा समय से योजनाओं को पूरा किया जा सके। सीएम ने इस पर भी नाराजगी जाहिर की है कि कुछ मेडिकल कॉलेजों में एक साथ सारे काम शुरू करा दिए गए जिससे कोई भी काम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि जहां 10% से कम काम हुए हैं उन्हें रोककर बाकी काम पूरा किया जाए।

चुनावी साल के पहले ब्रैंडिंग की चिंता
सूत्रों के अनुसार इन्फ्रास्ट्रक्चर, सड़क, सेहत से जुड़ी बड़ी योजनाओं को जल्द जमीन पर उतारने की चिंता सरकार की इसलिए भी है क्योंकि लोकसभा चुनाव सिर पर है। 2014 में 73 सीटे जीतने वाली भाजपा के शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखना योगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

करीब 20 महीने की योगी सरकार उपलब्धियों के तौर पर कर्जमाफी, पीएम आवास योजना, शौचालय निर्माण जैसे गांव- गरीबों से जुड़ी बुनियाद योजनाओं को पेश कर रही है। इनवेस्टर्स समिट के साथ ही चुनाव के पहले कुछ बड़े प्रॉजेक्ट के शिलान्यास और लोकार्पण के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि बुनियादी सुविधाओं के साथ ही बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी अहम काम हो रहे हैं।