राजस्थान विधानसभा चुनाव में दिलचस्प लड़ाई जारी, भाजपा ने सचिन पायलट के सामने मंत्री यूनुस को उतारा मैदान में

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच दिलचस्प लड़ाई जारी है। दोनों ही दल एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए नए-नए दांव आजमा रहे हैं। कुछ दिन पहले कांग्रेस ने सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ पूर्व बीजेपी नेता जसवंत सिंह से के बेटे मानवेंद्र सिंह को उताकर बड़ा दांव खेला था।
An interesting battle is going on in the Rajasthan assembly elections, BJP in front of Sachin Pilot in front of minister Yunus
अब बीजेपी ने भी कुछ वैसा ही दांव कांग्रेस के खिलाफ खेला है। बीजेपी ने सोमवार को जारी उम्मीदवारों की पांचवी सूची में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के सामने मौजूदा मंत्री यूनुस खान को मैदान में उतार दिया है।  सोमवार को बीजेपी ने राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए पांचवीं सूची जारी की।

इस सूची में राजस्थान सरकार में मंत्री यूनुस खान को टोंक से प्रत्याशी बनाया गया है। उधर, टोंक से कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को मैदान में उतारा है। ऐसे में अब इस सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। बता दें कि पायलट भी कांग्रेस की तरफ से सूबे में सीएम की रेस में हैं।  इससे पहले कांग्रेस ने 32 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में मानवेंद्र सिंह को झालरापाटन से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ मैदान में उतारकर बड़ा सियासी दांव खेला था। मानवेंद्र सिंह हाल ही में बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। यह सीट झालावाड़ जिले में आती है।

टिकट न मिलने पर बगावत
उधर बीजेपी और कांग्रेस दोनों की दलों में टिकट न मिलने को लेकर बगावत जारी है। रविवार को कांग्रेस और बीजेपी के कई नेताओं ने जगह नहीं मिलने पर विरोध जाहिर किया। कुछ नेताओं ने अपनी पार्टियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जबकि कई अन्य ने स्वतंत्र उम्मीदवारों के रूप में नामांकन कर एक त्रिकोणीय प्रतियोगिता बनाते हुए चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

ज्ञानदेव आहूजा का निर्दलीय लड़ने का ऐलान
बीजेपी के फायरब्रैंड नेता ज्ञानदेव आहूजा जो रामगढ़ के विधायक हैं, उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद संगानेर निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की। उधर, पीसीसी के महासचिव पंकज मेहता के समर्थकों ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के खिलाफ एक संवाददाता सम्मेलन में नारे लगाए और मेहता स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए कहा। हालांकि मेहता ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।