पार्टी कोई भी हो जीत इस दिग्गज की ही होती है, सबसे रोचक है सूबे की इस सीट का गणित

0
411

सतना। 28 नवंबर को मध्यप्रदेश में होने वाले लोकतंत्र के हवन में मतदाता भी अपनी आहुति डालने को तैयार हैं. सभी दलों के दिग्गज रणनीति के हिसाब से विरोधियों को विलेन बनाने की कोशिश में जुटे हैं. सूबे की ज्यादातर सीटों पर मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच है, लेकिन कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां बसपा, सपा और अन्य छोटे दल भी निर्णायक भूमिका में हैं.
The party is the victory of this great man, the most interesting is the seat of this seat of mathematics
ऐसी ही एक सीट मैहर है, जिसका किस्सा अपने आप में रोचक और मजेदार है. दरअसल, सतना जिले की मैहर विधानसभा सीट पर चुनाव के पहले जो समीकरण दिखते हैं, वह परिणाम के वक्त पलट जाते हैं. खास बात ये है कि इस सीट पर पार्टी नहीं बल्कि नेता जीतता है. लिहाजा यह सीट कई मायनों में अपने आप में अलग है. यहां के सियासी समीकरण का अंजादा लगाना बड़े बड़ों के लिए भी टेढ़ी खीर है क्योंकि यहां पार्टी विशेष नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष का दबदबा रहता है. इसके अलावा बीजेपी, कांग्रेस, सपा और बसपा का एक सा प्रभाव होना इस सीट को महत्वपूर्ण बनाता है. यहां इन चारों दलों के बीच टक्कर होता है.

मैहर ने हर बार दिया चौंकाने वाला परिणाम
विंध्य अंचल की मैहर सीट के मतदाता हर चुनाव में चौंकाने वाले परिणाम देते हैं. पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्हें देखकर कोई भी असमंजस में पड़ जायेगा क्योंकि यहां के वर्तमान विधायक नारायण त्रिपाठी तीन बार अलग-अलग पार्टियों के टिकट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे हैं, जबकि 2016 में हुए उपचुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गये, जो उनकी चौथी पार्टी थी.

मैहर के सियासी समीकरण
सतना जिले की मैहर सीट पर इस बार करीब 2.12 लाख मतदाता हैं. इस क्षेत्र में पटेल, ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. जिसके चलते ये वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं. ऐसे में सभी सियासी दल चुनाव दर चुनाव यहां इन्हीं जातियों के प्रत्याशियों पर दांव लगाते हैं. इस बार के सियासी रण में बीजेपी ने जहां एक बार फिर वर्तमान विधायक और ब्राह्मण चेहरे नारायण त्रिपाठी पर दांव लगाया है तो कांग्रेस ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी श्रीकांत चतुवेर्दी को मैदान में उतारा है, जबकि सपा-बसपा भी हर बार यहां प्रभावी भूमिका में रहते हैं. यही वजह है कि इस बार भी मैहर में मुकाबला रोचक दिख रहा है.

नारायण त्रिपाठी-अजय सिंह के बीच वर्चस्व की जंग
मैहर में भले ही कांग्रेस के प्रत्याशी श्रीकांत चतुवेर्दी हैं, लेकिन यहां वर्चस्व की जंग वर्तमान नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और बीजेपी प्रत्याशी नारायण त्रिपाठी के बीच रहती है. कभी कांग्रेस में रहे नारायण त्रिपाठी अजय सिंह के धुर विरोधी माने जाते हैं. त्रिपाठी के बीजेपी में आने के बाद इन दोनों नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग खुलकर सामने आ गई है. इनके बीच की कलह खुलकर तब सामने आई, जब 2014 के लोकसभा चुनाव में सतना सीट से चुनाव लड़ रहे अजय सिंह का नारायण त्रिपाठी ने कांग्रेस में रहते हुए विरोध किया था.

जिसका नतीजा ये हुआ कि अजय सिंह मामूली अंतर से बीजेपी प्रत्याशी गणेश सिंह से चुनाव हार गये. इसके बाद दोनों के बीच सियासी तल्खी बढ़ती चली गई. वहीं, बीजेपी में आने के बाद नारायण त्रिपाठी अजय सिंह को मैहर से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दे चुके हैं. ऐसे में इस बार कांग्रेस अजय सिंह के नेतृत्व में त्रिपाठी को घेरने की पूरी कोशिश कर रही है तो बीजेपी भी इस बार कांग्रेस प्रत्याशी को हराने में कोई कोताही नहीं बरत रही.

5वीं बार जीत दर्ज कर पायेंगे नारायण त्रिपाठी?
बात अगर बीजेपी प्रत्याशी नारायण त्रिपाठी की करें तो मैहर विधानसभा सीट पर उनका दबदबा माना जाता है. त्रिपाठी ने इस सीट से तीन अलग-अलग पार्टियों से चुनाव जीतकर सूबे में अपनी अलग पहचान बनाई है. भले ही त्रिपाठी का सियासी सफर दलबदल वाला माना जाता है, लेकिन सियासी हवाओं का रूख परखने में वे माहिर माने जाते है्ं?. यही वजह है कि वे मैहर से हर बार चुनाव जीत जाते हैं क्योंकि पूरे क्षेत्र के हर समाज में उनकी अच्छी पकड़ होने के चलते जनता ने उन्हें हर बार चुना है.

मैहर में इस बार इन मुद्दों की है गूंज
वहीं, मैहर विधानसभा क्षेत्र के मुद्दों की तरफ रुख किया जाये तो यहां तीन बड़ी फैक्ट्रियां होने के बावजूद बेरोजगारी का बोलबाला है. इसके अलावा जर्जर सकड़ों से लोगों में विधायक त्रिपाठी के खिलाफ नाराजगी देखी जा रही है. दूसरी तरफ मैहर में प्रसिद्ध शारदा माता का मंदिर होने के चलते यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इस दिशा में भी अब तक सार्थक प्रयास नहीं किये गये हैं. हालांकि, प्रत्याशी इस बार जनता के बीच पहुंचकर इन मुद्दों को खत्म करने का दावा करते नजर आ रहे हैं.