भाजपा के गढ़ उज्जैन में इस बार कौन मारेगा बाजी, भाजपा फिर लहराएगी भगवा या कांग्रेस करेगी सेंधमारी

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उज्जैन। मालवा अंचल में महाकाल की नगरी उज्जैन का सूबे की सियासत में अहम रोल रहता है. जिले का प्रतिनिधित्व प्रदेश सरकार में मंत्री पारस जैन करते हैं. खास बात ये है कि उज्जैन बीजेपी का गढ़ बनकर उभरा है क्योंकि साल 2013 में हुये विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जिले की सातों विधानसभा सीटों जीत का परचम लहराया था.
Who will die this time in BJP’s Ujjain, BJP will again wipe out saffron or Congress will blow
पूरे जिले में सत्ता पक्ष के विधायक होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लोग जनप्रतिनिधियों से संतुष्ट नहीं हैं. आम लोग जहां महंगाई की वजह से आक्रोशित हैं तो बेरोजगार युवाओं में नौकरी न मिलने से गुस्सा है. वहीं व्यापारी वर्ग भी कई मुद्दों के चलते खुश नजर नहीं आ रहा. अगर आधी आबादी की बात की जाए तो उनकी प्रतिक्रिया दोनों मुख्य सियासी दलों के लिए मिली-जुली ही सी है.

वहीं सियासी दलों की बात की जाए तो बीजेपी सभी वर्गों के विकास का दावा कर वोटों का गणित अपने पक्ष में करने की जुगत में है जबकि कांग्रेस यहां व्यापम, किसान जैसे प्रादेशिक मुद्दों के जरिये बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाना चाहती है.

वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिंहस्थ के विकास कार्यों को जनता स्थानीय विधायकों का काम नहीं मानती और किसानों का मुद्दा उज्जैन के ग्रामीण इलाकों में प्रभावी रहेगा. राजनीतिक जानकार कुछ भी आकलन करें, कुछ भी तर्क दें, लेकिन अंतिम फैसला जनता ही लेती है और जनता क्या फैसला लेगी इसका जवाब 11 दिसंबर को चुनावी नतीजे आने के बाद ही मिलेगा।