रायपुर। नगर निगम मुख्यालय से जारी एक आदेश इन दिनों किसी के गले नहीं उतर रहा है। इस अजीबो-गरीब आदेश ने कर्मचारियों को हलाकान करके रख दिया है। जो कर्मचारी किसी दूसरे कार्यों में अपनी भूमिका अदा कर रहे थे उनसे रोजाना गली-मोहल्लों, खाली प्लॉट में पड़ी एक-एक पॉलीथिन बिनवाई जा रही है।
Chhattisgarh: Halakan Employees, according to the order of the corporation, are lying in poly-hills
ऐसा आदेश पहली बार हुआ है। जबकि होना यह चाहिए कि निगम उन तमाम स्रोतों को बंद करवाए, जहां से रोजाना कई टन पॉलीथिन सीधे बाजार में आ रही है। खुले आम मालवीय रोड, बंजारी रोड समेत शहर के कई बड़े बाजारों में बिक रही है। निगम के आठ जोनों में से एक जोन भी एक दिन बाजारों में उतरे, कार्रवाई करे तो अपने आप बिक्री और उत्पादन बंद हो जाएगा।
सवाल यह है कि आखिर निगम पॉलीथिन बेचने वाले दुकानदारों पर सख्ती क्यों नहीं कर रहा है? क्यों इन्हें बेचने की छूट देकर रखी है? कार्रवाई कभी-कभार होती है और फिर बंद कर दी जाती है। पूर्व में यह कहा गया था कि पॉलीथिन कोई नहीं ले रहा है, जबकि सामान्य सभा में आदेश पारित हो चुका है कि इसे सीमेंट बनाने वाली कंपनी को दिया जाएगा। इससे निगम को राजस्व मिलेगा। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 को लेकर तैयारियां जारी हैं, कवायद उसके तहत ही है, लेकिन क्रियान्वयन गलत है।
1 दिसंबर शनिवार को पहली बार निगम अमला पॉलीथिन बीनने के लिए उतरा। पहले दिन 70 बोरी और रोजाना औसत 50 बोरी पॉलीथिन इकट्ठी की जा रही है। गुरुवार को 84 बोरी पॉलीथिन कचरा एकत्र किया गया। निगम रोजाना इससे संबंधित प्रेस रिलीज भी जारी कर रहा है। कहा ये जा रहा है कि कार्रवाई करने के लिए भी अफसर नहीं है, चुनावी ड्यूटी में लगे हैं।
जुर्माने का प्रावधान-
सामग्री बेचने के लिए प्लास्टिक कैरी बैग देना- 100 रुपये, दोबारा पकड़ने जाने पर 1000 रुपये।
सड़क, नाली में प्लास्टिक फेंकना- 100 रुपये, दोबारा पकड़े जाने पर 1000 रुपये।
कुल कचरे का सात फीसद होती है पॉलीथिन-
रायपुर के 70 वार्ड से अभी रोजाना 450 टन कचरा उठाया जाता है। यह कचरा घरों, दुकानों, मॉल, रेस्त्रां, होटलों से लेकर नाले-नालियों से निकलता है, जो सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप किया जाता है। अनुमान के तहत इसमें करीब सात फीसद पॉलीथिन होती है।
दबाव बढ़ेगा, निगम के राजस्व में भी होगा इजाफा-निगम अगर सख्ती दिखाए तो पॉलीथिन का उत्पादन करने वालों पर दबाव बनेगा, ये उत्पादन बंद करेंगे। इनकी मशीनों को सीज करने का प्रावधान है। कार्रवाई से निगम के राजस्व में भी अच्छा खासा इजाफा होगा। पिछली बड़ी कार्रवाई सालभर पहले वीआइपी चौक पर एक घर में संचालित फैक्टरी पर हुई थी। वहां पॉलीथिन बैग को बनाया जा रहा था। इसके बाद एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

