धार्मिक गोलबंदी की कोशिशों को वोटरों ने नकारा, भाजपा को सबसे ज्यादा हुआ नुकसान

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नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि इस बार मतदाताओं ने धार्मिक गोलबंदी की कोशिशों को नकार दिया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा है। पार्टी ने पहली बार इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को अपना पोस्टर बॉय बनाया था। उन्होंने पांचों राज्यों में 70 से अधिक रैलियां कीं। पूरा फोकस धार्मिक ध्रुवीकरण पर रखा। अली और बंजरगबली की तुलना कर हिंदू कार्ड खेला।

Voters deny religious bullying efforts, BJP worst damages
मध्य प्रदेश से लेकर तेलंगाना तक, योगी ने चुनाव को इसी धारा में मोड़ने की कोशिश की। उनकी रैलियों में भीड़ भी आई, लेकिन परिणाम उस अनुरूप नहीं आए। अमित शाह ने भी राष्ट्रवाद और शहरी नक्सली के मुद्दे को खूब हवा दी थी। कांग्रेस ने भी राहुल गांधी को हिंदू साबित करने में अधिक उर्जा लगाई।

वह कई मंदिरों में गए और आखिर में अपना गोत्र तक बता दिया। कांग्रेस के अंदर नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि अगर पार्टी किसान और नौजवान के मुद्दों पर और आक्रामक होती तो यह जीत बड़ी हो सकती थी। ऐसे नेता छत्तीसगढ़ की मिसाल देते हैं, जहां कांग्रेस बस इन्हीं मुद्दों पर लड़ी और पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।

किसान, नौजवान तय कर रहे मुद्दे
नतीजों से साफ है कि अब किसान और युवा जनादेश तय कर रहे हैं। वे अपने हिसाब से मुद्दे भी निर्धारित कर रहे हैं। गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भी यही ट्रेंड सामने आया था। यह दोनों वर्ग चुनाव की दिशा तय करने वाला सबसे निर्णायक फैक्टर बन गया है। ऐसे में सभी दलों को संकेत मिल चुका है कि उन्हें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में किस तरह उतरना है।

काउंटर अटैक में हुई देरी
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी को चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में अपनी गलती का अहसास हुआ था। उस समय तक बीजेपी नेता केवल भावनात्मक मुद्दे उछाल रहे थे, जबकि कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता का कार्ड खेला था। ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद बीजेपी ने काउंटर भी करना शुरू किया, लेकिन पार्टी के ही कई नेताओं का आॅफ रिकॉर्ड कहना है कि तब तक बहुत देर हो गई थी।

फेल हुई धार्मिक गोलबंदी
योगी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 63 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सभाएं कीं। इनमें से केवल 26 सीटों पर बीजेपी को बढ़त हासिल थी। योगी की सफलता दर 41 फीसदी रही। पिछली बार पार्टी इनमें से 47 सीटों पर जीती थी।