मप्र के सियासी दंगल में 24 घंटे से अधिक समय लगा मतगणना में, फिर भी किसी को नहीं मिला बहुमत

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भोपाल। मध्य प्रदेश के सियासी दंगल में कांटे की टक्कर और करीब 24 घंटे तक चली मतगणना के बाद भी अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि देश का दिल कहे जाने वाले इस राज्य में सत्ता का ताज किसके हाथ लगेगा। राज्य में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि पिछले 15 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी को 109 सीटों से संतोष करना पड़ा है।

MP’s political ruckus took more than 24 hours in counting, still no one got majority
मंगलवार देर रात तक मध्य प्रदेश में चुनावी नतीजे घोषित नहीं होने पर लोग चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाने लगे थे जबकि इसकी वजह कुछ और थी। आइए जानते हैं कि आखिर क्या वजह रही कि ईवीएम के इस दौर में 3,78,52,213 वोटों को गिनने में चुनाव आयोग को 24 घंटे से अधिक का समय क्यों लग गया….

करीब 22 राउंड में काउंटिंग
मध्य प्रदेश में सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हुई। इस बार चुनाव में कुल 5,04,95,251 मतदाताओं में से 3,78,52,213 मतदाताओं यानी 75.05 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। चुनाव में 1,094 निर्दलीय उम्मीदवारों सहित कुल 2,899 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना था। इनमें 2,644 पुरूष, 250 महिलाएं और पांच ट्रांसजेंडर शामिल थे। बीजेपी ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि कांग्रेस ने 229 सीटों पर टिकट दिया था।

चुनाव आयोग के मुताबिक औसतन करीब 22 राउंड में चुनावी प्रक्रिया पूरी हुई। अधिकतम 32 राउंड मतगणना इदौर-5 विधानसभा क्षेत्र में हुई, जबकि न्यूनतम 15 राउंड मतगणना अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा सीट में हुई। चुनाव आयोग ने मतगणना को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए करीब 15 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया था। एमपी में 51 मतगणना केंद्र बनाए गए थे। लंबे इंतजार के बाद आयोग ने बुधवार सुबह सवा आठ बजे अंतिम चुनाव परिणाम घोषित किया।

सबसे बड़ी वजह वीवीपैट मशीन
जानकारों के मुताबिक चुनाव आयोग की इतनी तैयारियों के बाद भी ईवीएम से मतगणना पूरी करने में 24 घंटे लग जाने के कई कारण है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी वजह वीवीपैट मशीनें रहीं। मतगणना के दौरान ऐसा कई जगहों पर हुआ कि जहां उम्मीदवारों ने अपने संदेह को दूर करने के लिए मशीनों से वोटों की गणना के बाद वीवीपैट मशीनों की पर्ची भी गिनवाई। इससे रिजल्ट आने में काफी देरी हुई।

उन्होंने बताया कि इस बार चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान अति सतर्कता बरती ताकि किसी को भी परिणाम को लेकर कोई संदेह न रहे। इस वजह से भी चुनाव परिणाम देरी से आए। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर चुनाव के दौरान मतदान अधिकारी ईवीएम में चुनाव शुरू होने से पहले डाले गए मॉक वोट को डिलीट करना भूल गए थे। इसलिए 175 ईवीएम की पर्चियों को भी गिना गया। इससे भी नतीजों में देरी हुई।

बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है। कांटें की टक्कर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं बीजेपी को दूसरे नंबर से संतोष करना पड़ा है। अब दोनों ही दलों ने कहा है कि वह सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। चुनावी नतीजों में कांग्रेस को 114, बीजेपी को 109, बीएसपी को 2, समाजदवादी पार्टी को 1 सीट तथा 4 निर्दलीय चुनाव जीते हैं।