अमेठी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में कांग्रेस की जीत के पीछे राहुल गांधी के ‘टेंपल रन’ के असर से इनकार नहीं किया जा सकता। मंदिरों में राहुल गांधी की आवाजाही को भी हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहे जाने वाले तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की जीत की वजह माना ही जा रही है। यह बात शायद राहुल गांधी भी समझ रहे हैं। शायद इसलिए लोकसभा चुनाव से पहले वह अपने संसदीय क्षेत्र के मंदिरों की सुध ले रहे हैं।
Temple run for Rahul after temple victory in three states, now Amethi will be the restoration of the temples
दरअसल, राहुल गांधी अमेठी के कई मंदिरों के जीर्णोद्धार की कोशिशों में लगे हैं। इसके लिए उन्होंने बाकायदा मंदिरों को पैसा भी उपलब्ध कराया है। वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी की इस पहल को अच्छा तो माना है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि उनकी नीयत सही नहीं है।
कीर्तन और अन्य साज के लिए फंडिंग
राहुल गांधी ने अमेठी क्षेत्र में आने वाले मंदिरों को कीर्तन के लिए हार्मोनियम, ढोलक, मंजीरा और करताल जैसे म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट्स भी देने का फैसला किया है। वहीं अमेठी के ही गौरीगंज स्थित पूरे दुर्गा मंदिर में सोलर लाइट की भी व्यवस्था की है। इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने यहां एक सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए सितंबर में ही पैसा मंजूर कर दिया था। उन्होंने संग्रामपुर ब्लॉक स्थित कालिका देवी मंदिर में प्रकाश व्यवस्था के लिए भी फंड जारी किया है।
दुष्प्रचारों का जवाब है राहुल का यह प्रयास!
राहुल गांधी के इस पहल को जहां विपक्षी दलों की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है वहीं कांग्रेस समर्थकों में इस बात को लेकर काफी उत्साह का माहौल है। राहुल गांधी के इस बदले रूप को आरएसएस-बीजेपी के उन दुष्प्रचारों का जवाब माना जा रहा है जिसनें ये भगवा पार्टियां उनके हिंदू होने पर संदेह करती रही हैं।
पार्टी की अमेठी ईकाई के एक वरिष्ठ नेता इस बाबत कहते हैं कि भगवा ब्रिगेड राहुल गांधी को क्रिश्चियन महिला का बेटा बुलाती हैं। वे ऐसा प्रचार करते हैं कि राहुल गांधी क्रिश्चियनिटी की ओर ज्यादा झुके हैं जबकि यह आधा सत्य है। उन्होंने आगे कहा कि यह उनकी साजिश है ताकि लोगों को राहुल गांधी की शिवभक्ति और हिंदू लोगों के प्रति उनके सम्मान-भाव को लेकर कन्फ्यूजन क्रिएट किया जा सके।

