कमलनाथ कैबिनेट का फार्मूला तय, नए विधायकों को नहीं मिलेगा मौका, सिंधिया समर्थक रहेंगे हावी

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल को लेकर दिल्ली में तीन दिन से चल रही माथापच्ची का नतीजा अभी भी सामने नहीं आ पाया है, मगर यह फार्मूला लगभग तय हो गया है कि पहली बार के विधायक मंत्रिमंडल में नहीं लिए जाएंगे। वहीं, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की संख्या करीब एक तिहाई होगी। रविवार को नाथ की एके एंटोनी से मुलाकात हुई और सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मंत्रिमंडल के संभावित सदस्यों की सूची के साथ भेंट होने की संभावना है।
Kamal Nath Cabinet formula fixed, new MLAs will not get chance, Scindia supporters remain dominant
सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ मंत्रिमंडल में प्रदेश के सभी दिग्गज नेताओं के समर्थकों को लिए जाने के संतुलन वाले फामूर्ले पर रविवार को भी मशक्कत होती रही। दिनभर नाथ की टेलीफोन पर तमाम दिग्गज नेताओं के साथ चर्चा चली। फिर उनकी शाम को एआईसीसी के पर्यवेक्षक बनकर विधायक दल की बैठक लेने वाले एके एंटोनी से मुलाकात हुई। इसके बाद शाम को नाथ ने दोबारा नेताओं से टेलीफोन पर चर्चा की। सोमवार को मंत्रियों की सूची फाइनल करके टेलीफोन पर सभी को सूचना दे दी जाएगी।

सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों को शामिल किए जाने को लेकर सबसे ज्यादा संवेदनशील सांसद सिंधिया दिखाई दे रहे हैं। उनके समर्थक मंत्रियों की संख्या कुल मंत्रियों का एक तिहाई होगा। साथ ही कुछ विभागों को लेकर भी नेताओं के समर्थकों के बीच बंटवारा होना है, जिसका नाम के साथ ही फैसला होने के संकेत हैं। निर्दलीय विधायकों में से प्रदीप जायसवाल और ठा. सुरेंद्र सिंह शेरा भैया को मंत्री बनाए जाने का लगभग फैसला हो चुका है।

मंत्रिमंडल में युवा चेहरे ज्यादा होंगे
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ विधायकों को नेताओं के समर्थकों से अलग रखकर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फामूर्ला तैयार किया गया है। इनमें डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह, आरिफ अकील, लक्ष्मण सिंह, विक्रम सिंह नातीराजा, बिसाहूलाल सिंह, विजयलक्ष्मी साधौ और सज्जन सिंह वर्मा के नाम प्रमुख हैं। राजस्थान की तरह मध्यप्रदेश में युवा विधायकों को मंत्रिमंडल में ज्यादा जगह मिलने की संभावना है और ऐसे करीब डेढ़ दर्जन मंत्री बनाए जा सकते हैं। गृह डॉ. गोविंद सिंह, परिवहन लखन घनघोरिया, नगरीय विकास सज्जन सिंह, खनिज केपी सिंह को मिलने के संकेत है।

इन नेता समर्थकों के नाम चर्चा में आए
वहीं, मंत्री बनाए जाने वाले कमलनाथ समर्थकों में बाला बच्चन, हुकुम सिंह कराड़ा, लखन घनघोरिया, तरुण भनोत, दीपक सक्सेना, सिंधिया समर्थकों में प्रद्मुम्नसिंह तोमर, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. प्रभुराम चौधरी, तुलसीराम सिलावट, राजवर्द्धन सिंह, लाखन सिंह यादव तो दिग्विजय सिंह समर्थकों में बृजेंद्र सिंह राठौर, घनश्याम सिंह, हिना कांवरे, प्रियव्रत सिंह व सुरेंद्र सिंह बघेल के नाम नेताओं ने मंथन में लिए हैं। यही नहीं जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, ओमकार सिंह मरकाम, कमलेश्वर पटेल, सचिन यादव, हरदीप सिंह डंग, झूमा सोलंकी, पीसी शर्मा व हिना कांवरे के नाम भी चर्चा में आए हैं।

विस अध्यक्ष मंत्री नहीं बनेगा
इधर, विधानसभा अध्यक्ष के लिए इनमें से जिस नेता को चुना जाएगा तो उसे मंत्री नहीं बनाया जाएगा और कुछ नाम क्षेत्रीय संतुलन के कारण भी बाहर हो सकते हैं। वैसे विधानसभा अध्यक्ष के लिए कोई वरिष्ठ विधायक तैयार नहीं हो रहा है। चर्चा में दो नए नाम भी आए हैं। ये हैं पृथ्वीपुर के विधायक बृजेन्द्र सिंह राठौर और कटंगी के विधायक टामलाल सहारे।