भाजपा ने गोवर्धन झड़ापिया को बनाया यूपी का लोकसभा चुनाव प्रभारी, शाह का करिश्मा दोहराने की होगी चुनौती

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नई दिल्ली। बीजेपी ने 2002 के गोधरा दंगों के दौरान गुजरात के गृह मंत्री रहे गोवर्धन झड़ापिया को लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी चीफ अमित शाह के पास यह जिम्मेदारी थी। बीजेपी ने 2019 के आम चुनाव के लिए बुधवार को 18 राज्यों के प्रभारियों की सूची जारी की।
BJP will be in charge of Lok Sabha election for Govardhan Jhadapia, Shah will be able to replicate his charisma
पार्टी ने प्रकाश जावड़ेकर (राजस्थान), भूपेंद्र यादव (बिहार) और अनिल जैन (छत्तीसगढ़) जैसे सीनियर नेताओं को उनके प्रदेश का प्रभारी बनाए रखा, जबकि बाकी प्रदेशों के प्रभारियों में बदलाव किया। अभी तक यूपी के सह-चुनाव प्रभारी रहे ओम प्रकाश माथुर को गुजरात का चुनाव प्रभारी बनाया गया है।

झड़ापिया के नाम का ऐलान बीजेपी के अंदर भी कई लोगों के लिए हैरानी भरा रहा क्योंकि उन्हें वीएचपी के पर्ू्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का करीबी माना जाता है। कभी नरेंद्र मोदी के दोस्त रहे तोगड़िया पिछले कुछ समय से उन पर लगातार हमले कर रहे हैं। झड़ापिया को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल और संजय जोशी का भी करीबी माना जाता रहा है, जिनसे मोदी के रिश्ते अच्छे नहीं हैं।

2004 में वाजपेयी सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद मोदी ने गुजरात में अपने कैबिनेट का विस्तार किया था, जिसमें झड़ापिया ने शपथ लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान स्टेज से ही ऐलान किया था कि वह इस सरकार का हिस्सा नहीं बने रहना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद मोदी ने झड़ापिया की जगह अमित शाह को गृह मंत्रालय का प्रभार दिया था। झड़ापिया इसे वापस पाना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें कैबिनेट विस्तार में भी गृह मंत्रालय नहीं दिया तो, उन्होंने सरकार से अलग होने का फैसला कर लिया।

2004 में वह बीजेपी से अलग हो गए थे, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने वापस पार्टी की सदस्यता ले ली। हालांकि, अभीतक उन्हें पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई थी और 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट देने तक से मना कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक टिकट मिलने पर वह मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में उभर सकते थे, जिस वजह से उनका टिकट काट दिया गया।

आनंदीबेन पटेल को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटाने के पीछे झड़ापिया की अहम भूमिका मानी जाती है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, झड़ापिया को एक चतुर नेता माना जाता है और उनके संगठनात्मक कौशल से बीजेपी को यूपी में फायदा पहुंच सकता है। कुछ बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें नई जिम्मेदारी देने के पीछे उनको गुजरात से बाहर रखने की रणनीति भी हो सकती है।