नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में डेढ़ दशक बाद सत्ता से बेदखल हुई भाजपा में अब नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। पार्टी का प्रदेश संगठन इस मुद्दे पर मौन है, संसदीय दल और विधायक दल की बैठक में इसका फैसला होगा। दोनों ही पद के लिए दिल्ली की हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है।
Waiting for green flag from Delhi for Leader of the Opposition and Assembly Vice President
मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 7 जनवरी से शुरू होना है, इसलिए नेता प्रतिपक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष के चयन को लेकर संभावित दावेदार अपनी लॉबिंग में जुट गए हैं। इन दोनों पदों के अलावा भाजपा संगठन द्वारा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए भी अपना प्रत्याशी उतारने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके पीछे पार्टी का तर्क है कि इस बहाने कांग्रेस के बहुमत संबंधी दावे का विधानसभा के फ्लोर पर अपने आप ही परीक्षण हो जाएगा। विस अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को मैदान में उतारने से नुकसान कुछ भी नहीं होगा, लेकिन इससे सत्तापक्ष को परेशान करने का एक मौका भाजपा को मिल जाएगा।

भाजपा संसदीय दल की बैठक का अभी तक कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। जनवरी पहले-दूसरे सप्ताह में बैठक की संभावना है। इस बहुप्रतीक्षित बैठक में मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बारे में भी नेता प्रतिपक्ष का निर्णय लिया जाना है। इसलिए तीनों राज्यों के बारे में एक ही दिन में फैसला कर लिया जाएगा। इसी दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए भी किसी वरिष्ठ नेता के नाम का एलान कर दिया जाएगा। इस बारे में भाजपा संगठन में अब तक प्रारंभिक स्तर पर भी विचार विमर्श नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर भी संसदीय दल ही अंतिम निर्णय लेगा।