आतंक की डगर छोड़ फिर आतंकी बनने वाले बढ़ा रहे हैं मुश्किलें

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नई दिल्ली। सुरक्षा बलों ने शनिवार को जिस आतंकी जीनत उल रहमान को मार गिराया, वह दो बार का रीसाइकल्ड आतंकी था। यानी वह दो बार आतंक की राह छोड़कर फिर आतंकी बन गया था। शनिवार को मुठभेड़ में अलबदर के चीफ कमांडर और 12 लाख रुपये के इनामी जीनत के साथ दूसरा आतंकी शकील अहमद डार भी मार गिराया गया।
The horrors of terror are leaving, terrorists are raising the difficulties
अब केवल 2 बचे हैं
पिछले साल नवंबर में आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि हमने घाटी में सक्रिय 12 आतंकियों की लिस्ट बनाई है। इसमें से एक-एक कर सबको निपटाया जा रहा है। जीनत उल- रहमान भी इसी लिस्ट में शामिल था। इस लिस्ट में सभी ए प्लस और ए डबल प्लस कैटिगरी के आतंकी हैं। इस लिस्ट में शामिल आतंकियों में से अब बस दो आतंकी जिंदा बचे हैं, जिन पर सुरक्षा बलों की नजर है। इसमें हिजबुल आतंकी रियाज निक्कू और अंसार गजावत-उल-हिंद का आतंकी जाकिर मूसा शामिल है। जीनत की तरह ही ये दोनों ही ए-डबल प्लस कैटिगरी के आतंकी हैं।

यह है आतंकियों की कैटिगरी
एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक आतंकियों ने कितनी वारदात को अंजाम दिया है, उससे उनकी कैटिगरी तय की जाती है। आतंकी बनते ही उसे सी कैटिगरी में रखा जाता है और फिर बी, ए, ए-प्लस और टॉप की कैटिगरी ए-डबल प्लस है। कई बार आतंकी वारदातों को अंजाम देने के बाद आतंकवादी खुद ही उसका जिम्मा ले लेते हैं और कई बार जांच में तथ्य सामने आता है।

ये पहले से ज्यादा खतरनाक
घाटी में कई ऐसे आतंकी सक्रिय हैं, जो आतंकी की राह छोड़ने के बाद दोबारा इस राह पर चल पड़े हैं। ऐसे रीसाइकल्ड आतंकी ही सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ा रहे हैं। वजह यह है कि ऐसे आतंकी एक बार जब आतंक की राह छोड़कर आते हैं, तो कुछ वक्त बाद फिर सभी के बीच मिलते-जुलते हैं। कई बार ये उस दौरान युवाओं को बरगलाने पर फोकस करते हैं। जब यह फिर से आतंकी बन जाते हैं, तो पहले से ज्यादा खतरनाक होते हैं।

सेना के एक अधिकारी ने कहा कि 99 फीसदी आतंकी जो आतंक की राह को छोड़कर आते हैं, वह वापस नहीं जाते। कुछेक को लगता है कि लोग उन्हें स्वीकार नहीं कर रहे या उन्हें अब भी आतंकवादी ही समझ रहे हैं, तो वह फिर आतंक की राह पर चले जाते हैं।  दिक्कत यह भी है कि आतंकवादी भी उनका साथ छोड़कर आए लोगों को लगातार अप्रोच करते हैं क्योंकि उनके लिए यह ऐसेट की तरह होते हैं, जिन्हें उन्होंने ट्रेन्ड किया होता है। जीनत उल इस्लाम और उसके साथी की मौत सुरक्षा बलों के लिए इस साल की पहली बड़ी कामयाबी है। आतंकी जीनत आईईडी एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाता था और दर्जनों आतंकी वारदातों में शामिल था।