नई दिल्ली
केंद्र ने 30 केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) को लिए 1,496 करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि सामान्य श्रेणी के गरीबों को शैक्षणिक सत्र 2019-20 में सत्र दिए जाने वाले आरक्षण को लागू किया जा सके। दिल्ली विश्वविद्यालयों (डीयू) और विश्व भारती को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से पहले ही स्वीकृति पत्र मिल चुके हैं। वहीं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को जल्द ही स्वीकृति पत्र मिल जाएंगे।
डीयू ने 143.8 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जबकि इसके संबद्ध कॉलेजों के लिए सरकार ने 47.2 करोड़ रुपये जारी किए हैं। सामान्य श्रेणी के गरीबों को अन्य श्रेणियों जैसे अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की तरह विश्वविद्यालयों और संस्थानों में आरक्षाण दिया जाएगा। गरीबों को आरक्षण बिना किसी श्रेणी के आरक्षण को छुए बिना मिलेगा। इससे प्रत्येक विश्वविद्यालय या संस्थान में 25 प्रतिशत सीटें बढ़ जाएंगी।
ज्यादातर केंद्रीय विश्वविद्यालय 25 प्रतिशत बढ़ी सीटों को दो चरणों में लागू करेंगी। जिसमें 2019-20 शैक्षणिक सत्र में 10 प्रतिशत और 2020-21 के सत्र में 15 प्रतिशत सीटों को लागू किया जाएगा। हालांकि जेएनयू सहित कुछ अन्य विश्वविद्यालय 2019-20 के शैक्षणिक सत्र में ही इसे लागू करेंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, ‘आगामी शैक्षणिक सत्र में केंद्रीय विश्विविद्यालयों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लागू करने के लिए 1,496 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। जिसमें से 230 करोड़ रुपये रखरखाव, 249 करोड़ रुपये तनख्वाह और 957 करोड़ रुपये निर्माण और ढांचे के लिए जारी किए गए हैं।’
मंगलवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के साथ बैठक के बाद सीयू के कुलपतियों को कुछ स्वीकृति पत्र सौंपे जा चुके हैं। वर्तमान में स्नातक स्तर पर 23 आईआईटी में 12,000 सीटें मौजूद हैं। जिसकी संख्या ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के लिए दो चरणों में बढ़ाकर 17,000 की जाएगी।

