श्रावण मास में श्रृंगार कराने की बुकिंग एक माह पहले ही फुल

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उज्जैन TIO

श्रावण मास में भगवान महाकाल का भाग से श्रृंगार कराने की इच्छा रखने वाले भक्तों को अब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि इस बार श्रावण मास में श्रृंगार कराने की बुकिंग एक माह पहले ही फुल हो गई है। भक्तों ने भादौ मास के प्रथम पखवाड़े की अधिकांश तारीखें भी बुक करा रखी हैं। बता दें इस बार 17 जुलाई से श्रावण मास की शुरूआत होगी।

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली संध्या आरती में भगवान महाकाल का भांग व सूखे मेवे से शृंगार किया जाता है। पुजारी भक्तों की ओर से यह श्रृंगार करते हैं। भगवान का भांग श्रृंगार करने में 5 से 6 हजार रुपए का खर्च आता है।

इसमें भांग, सूखे मेवे, वस्त्र, पूजन सामग्री आदि सामग्री शामिल रहती है। इसके लिए मंदिर कार्यालय से 500 रुपए की शासकीय रसीद कटानी होती है। शेष राशि पुजारी को अलग से देना होती है। श्रृंगार कराने वाले भक्त पूजन व आरती के समय नंदी हॉल में मौजूद रहते हैं।

श्रावण मास में भगवान का भांग से श्रृंगार कराने के लिए देश-विदेश के भक्तों में होड़ सी रहती है। इसके लिए वे महीनों पहले ही 500 रुपए की शासकीय रसीद कटाकर बुकिंग करा लेते हैं। इस बार भी 24 जून से पहले ही श्रावण मास की बुकिंग फुल हो गई है। भादौ मास के प्रथम पखवाड़े की अधिकांश तारीखें भी बुक हो चुकी हैं।

एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव के बाद अब तीन किलो भांग का होता है उपयोग
ज्योतिर्लिंग महाकाल का क्षरण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने कई सुझाव दिए थे। इसमें से एक भगवान के भांग श्रृंगार में मात्रा सीमित करने का था। मंदिर समिति ने बताया था कि क्षरण रोकने के लिए अब भगवान के श्रृंगार में तीन किलो भांग का ही उपयोग होगा। समिति ने इस कदम को उचित माना था। बता दें पहले प्रतिदिन श्रृंगार में करीब 5 किलो भांग का उपयोग होता था।

इन रूपों में होता है श्रृंगार
पं.महेश पुजारी के अनुसार विशेष तिथि, वार और त्योहार के अनुसार भगवान का रूप निखारा जाता है। पुजारी आदित्य (सूर्य), गणेश, श्रीकृष्ण, तिरुपति बालाजी, राजाधिराज आदि कई रूपों में भगवान का शृंगार करते हैं। इसके बाद भगवान को नवीन वस्त्र तथा रजत आभूषण धारण कराए जाते हैं। भांग के अलावा कुमकुम, चंदन, मावा आदि से भी भगवान का श्रृंगार किया जाता है।