नई दिल्ली
सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख संवेदी सूचकांक अपने सर्वकालिक सर्वोच्च स्तर के आसपास हैं। बावजूद इसके ज्यादातर म्यूचुअल फंड निवेशकों में उत्साह नहीं देखा जा रहा है। उन निवेशकों में निराशा का भाव कुछ ज्यादा ही है जिन्होंने इस विश्वास के साथ सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लांस (एसआईपी) के जरिए शेयरों में निवेश किए हैं कि एसआईपी से इक्विटी में निवेश पर कोई खतरा नहीं रहता है।
रिस्क फ्री नहीं होता है SIP से इक्विटी इन्वेस्टमेंट
हां, यह सही है कि एसआईपी से मार्केट टाइमिंग से जुड़ा जोखिम घट जाता है। साथ ही, इससे निवेशकों को दाम घटने पर ज्यादा शेयर खरीदने का मौका मिल जाता है। लेकिन, यह भी सही है कि इससे शेयरों में निवेश रिस्क फ्री नहीं हो जाता। एटिका वेल्थ अडवाइजर्स के एमडी और सीईओ गजेंद्र कोठारी कहते हैं, ‘बड़े शहरों में एसआईपी की समझ साल-दर-साल बढ़ रही है। हालांकि, छोटे शहरों के निवेशक अब भी एसआईपी को लेकर पर्याप्त समझ नहीं रखते और अब भी मानते हैं कि एसआईपी इक्विटी में निवेश को जोखिम मुक्त कर देगा।’
बैंकों के रिलेशनशिप मैनेजर करते हैं दुष्प्रचार
दरअसल, इसका काफी बढ़-चढ़कर दुष्प्रचार करने वाले बैंक रिलेशनशिप मैनेजर अब भी लोगों को एसआईपी के जरिए निवेश को राजी करने के लिए हर तरह की चालबाजियां कर रहे हैं। इस आर्टिकल के लेखक को हाल ही में एक बड़े विदेशी बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर से कॉल आई जिन्होंने नया एसआईपी शुरू करने पर 700 रुपये का गिफ्ट वाउचर ऑफर किया।
कुछ निवेशकों ने तो शेयरों में निवेश करना ही यही सोचकर शुरू किया कि एसआईपी से उनका इक्विटी इन्वेस्टमेंट रिस्क फ्री हो जाएगा। ऐसे निवेशक अब अपने शेयरों के भाव गिरते देख हैरान हैं, खासकर वैसे लोग जिन्होंने 2-3 वर्ष की पर्याप्त अवधि तक एसआईपी किया था। झटके से सचेत निवेशकों ने एसआईपी से हाथ खींचना शुरू कर दिया है। इस वजह से अप्रैल के 8,238 करोड़ रुपये के एसआईपी इन्वेस्टमेंट के मुकाबले मई महीने में यह घटकर 8,138 करोड़ रुपये रह गया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एसआईपी इन्वेस्टमेंट में सालाना आधार पर गिरावट आई है और मई महीने में 12% के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है।

