कत्थे में किवाम सा घुल जायेगा,
इश्क़ में सब लाल ही हो जायेगा,
रंग चेहरे का निखर जायेगा और,
रंग तेरा मुझसे जब मिल जायेगा,
सुरमयी सी चाँदनी मुस्कायेगी,
खूबसूरत चाँद भी शरमायेगा,
इश्क़ में बेताबियाँ होती बहुत,
गुफ़्तगू बेहाल भी कर जायेगा,
अज़नबी अल्फ़ाज ढूढेगे तुम्हें,
ख़ुद ब ख़ुद मदहोश मन हो जायेगा,
आशिक़ी का ये तरीक़ा ठीक है,
चाँद बाँहों में सिमट सा जायेगा,
मैं तुम्हें बोलूँगा लव यू स्वीट हार्ट,
और चेहरा गेसु में ढक जायेगा,
आ गया है बादलों का काफ़िला,
फिर कभी ये सिलसिला हो जायेगा,
प्यार में हैं अश्क़ झड़ते नज़्म से,
बादलों को भी मज़ा आ जायेगा,
बेक़रारी इस क़दर बढ़ती है जब,
इश्क़ रूहानी मेरा हो जायेगा,
शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’
चेन्नई:


