केसवानी यारबाश फ़ितरत के शख़्स थे

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ओम थानवी

राजकुमार केसवानी के जाने की खबर ने झकझोर कर रख दिया है। भोपाल में गैस त्रासदी से कितना पहले आगाह किया था उन्होंने। अपने छोटे-से अख़बार में बड़ी रिपोर्टिंग की। मरहूम बीजी वर्गीज़ साहब ने कालजयी खोजी रिपोर्टिंग के चुनिंदा उदाहरण लेकर किताब निकाली, उसमें केसवानीजी का दाय भी शामिल हैं। अमेरिका से किसी ने भोपाल त्रासदी पर वृतचित्र बनाया, जिसमें केसवानी हर जगह मौजूद रहे। अमेरिका बुलाए भी गए।

वे हिंदी सिनेमा के गहरे जानकार थे। साहित्य अनुरागी थे। कविता भी करते थे। संगीत के रसिया थे। लाख से बने पुराने रेकार्डों का उनके पास बड़ा संग्रह था। और भी अनेक दुर्लभ चीज़ें। जब भी भोपाल जाना हुआ, केसवानीजी के घर ज़रूर गया। ट्रेन से लौटता तो सिंधी घी-रोट “कोकी” भाभीजी से बनवा कर साथ लाता था।

केसवानी यारबाश फ़ितरत के शख़्स थे। ठहाकों के बग़ैर उनकी कोई बात पूरी नहीं होती थी। पर काम में सदा गम्भीर रहते। ज्ञान भाई के साथ मिलकर ‘पहल’ को बचाने की उन्होंने कितनी कोशिश की। मगर पहल अंततः बंद हो गई। पीछे कोरोना हमारे राजकुमार को ले गया। बहुत दुखद।