महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़, राज ठाकरे की मनसे में शामिल हो सकता है शिंदे गुट!

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सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र की लड़ाई:SC ने शिंदे गुट से पूछा- आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए, जवाब मिला- धमकाया जा रहा, माहौल सही नहीं

TIO NEW DELHI

महाराष्ट्र में पिछले एक सप्ताह से चल रहे सियासी ड्रामे के बीच नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। अब खबर है कि शिवसेना का बागी एकनाथ शिंदे गुट राजनीति के नए विकल्प तलाश रहा है। शिवसेना के नाम पर राजनीति करने वाला शिंदे गुट ठाकरे नाम और हिंदुत्व दोनों को नहीं छोड़ना चाहता है। ऐसे में एकनाथ शिंदे गुट के 38 विधायक राज ठाकरे की पार्टी मनसे में शामिल हो सकते हैं। 

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। बागी विधायक एकनाथ शिंदे की याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बीएस पादरीवाला की बेंच ने पूछा कि आप पहले हाईकोर्ट क्यों नहीं गए। इस पर शिंदे की ओर से नीरज किशन कौल ने कहा- हमें धमकाया जा रहा है, कह रहे हैं कि शव वापस आएंगे। मुंबई में माहौल हमारे लिए ठीक नहीं।

इस केस में शिवसेना का पक्ष अभिषेक मनु सिंघवी रखेंगे। सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है ताकि गुवाहाटी में बैठे बागी विधायक भी इसे देख सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एकनाथ शिंदे ने इस मसले पर राज ठाकरे से दो बार फोन पर बातचीत भी की है। भले ही कहा जा रहा हो कि शिंदे ने राज ठाकरे की तबीयत जानने के लिए उन्हें फोन किया था, लेकिन इसकी असली वजह यही बताई जा रही है कि शिंदे गुट मनसे में शामिल होकर राज्य में राजनीति के नए समीकरण गढ़ना चाहता है। 

गुपचुप हुई मुलाकात में तय हो गया था सब?
रिपोर्ट्स की मानें तो शिंदे गुट का मनसे में विलय दो दिन पहले  देवेंद्र फडणवीस से एकनाथ शिंदे की गुपचुप मुलाकात में ही तय हो गया था। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। यहीं से नई रणनीति पर चर्चा हुई थी। हालांकि, भाजपा अभी भी शिंदे गुट के मनसे में विलय को लेकर संशय में है। इसकी वजह राज ठाकरे के तेवर हैं। 

क्यों पड़ रही विलय जरूरत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भले ही एकनाथ शिंदे के पास शिवसेना के 38 बागी विधायकों का समर्थन हो, लेकिन नई पार्टी के रूप में उनको मान्यता मिलना आसान नहीं है। ऐसे में शिंदे गुट राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस मसले को हल करना चाहता है। इसलिए, उसके लिए सबसे आसान यही है कि वह राज ठाकरे की पार्टी मनसे में विलय कर ले। ऐसे में उसके पास ठाकरे नाम भी बचा रहेगा और हिंदुत्व का एजेंडा भी।