बिल्लयों के गुर्राने से शेर काबू नहीं आते : धर्मेन्द्र

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शशी कुमार केसवानी
बातें फिल्मी

नमस्कार दोस्तों, आज बात एक ऐसे मेरे पसंदीदा कलाकार की करते है जिसका मैं बचपन से ही दिवाना रहा हूं। और उनकी सभी फि ल्में लगभग दो या तीन बार तो देखी ही है। मेरे साथ मेरा परिवार भी उसका दिवाना रहा। जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं भारतीय फिल्मों के हीमैन कहे जाने वाले धर्मेन्द्र पाजी की। मेरे अलावा न जाने कितने लोगों के दिलों पर राज करने वाले धरम जी तो हमेशा नरम रहते है पर कभी-कभी धरम गरम भी हो जाता है। पर ये गरम सोडा की बोतल की तरह रहता है। जो मिनटों में अपना गुबार निकाल देता है। अनेकों लोगों की मदद करने वाले धरम पाजी जमीनी हकीकत से हमेशा जुड़े रहे। मैंने एक बार उनसे पूछा था अपका पसंदीदा ब्रांड कौन सा है तब उन्होंने बड़ी गंभीरता से कहा था वो क्या होता है ? अरे जब जो मिल जाए मैं सब पी लेता हूं। ये सब दिखावा होता है कि मैं जानी वाकर के अलावा नहीं पीता। मैंने न जाने कितने लोगों को जानीवाकर की बोतल में न जाने क्या-क्या पीते देखा है। बस पीने का मजा आना चाहिए। पिलाने वाला किस प्यार के साथ पिला रहा है वैल्यू उस बात की होती है। धरम पाजी की मुझे यह बात हमेशा याद रहती है कि आदमी कही भी पहुंच जाए उसे अपनी जमीन से जुड़े रहना चाहिए। मैंने हंसते हुए एक बार कहा था कि मुझे आपका आशिकाना स्वभाव मजेदार लगता है। तब उन्होंने जवाब दिया था कि मैं तो सामने वाले की खुशी में खुश हो जाता हूं। अगर उसे आशिकाना लगता है तो शानु कि फर्क पेंदा है। पर कुल मिलाकर धरम पाजी की जितनी बातें की जाए वो कम है आजकल उन्हें उर्दू शायरी का शौक है उनकी एक किताब आई है दूसरी किताब की तैयारी चल रही है हालांकि की पहली किताब की लांचिंग नहीं हो पाई थी। दोनों किताब की लांचिंग जल्दी ही होती। तो आइए आज उनके जीवन के कुछ किस्सों पर बात फिल्मी करते है।


8 दिसम्बर 1935 को पंजाब में जन्मे फिल्म अभिनेता और निर्माता धर्मेन्द्र का पूरा नाम धरम सिंह देओल है। धर्मेन्द्र के पिता स्कूल हेडमास्टर थे। अपने गांव से मीलों दूर धर्मेन्द्र ने एक सिनेमाघर में सुरैया की फिल्म दिल्लगी देखी और इससे वे इतने प्रभावित हुए कि अपना करियर उन्होंने फिल्मों में बनाने का निश्चय किया। धर्मेन्द्र ने 40 दिनों तक रोजाना दिल्लगी देखी और इस फिल्म देखने के लिए मीलों पैदल चले। धर्मेन्द्र को जब पता चला कि फिल्मफेअर नामक पत्रिका नई प्रतिभा की खोज कर रही है तो उन्होंने भी फॉर्म भेजा। धर्मेन्द्र ने कही से अभिनय नहीं सीखा था। इसके बावजूद उन्होंने तमाम प्रतिभाशाली लोगों को पीछे छोड़ा और वे इस टैलेंट हंट में चुन लिए गए। धर्मेन्द्र को लगा कि अब उन्हें फिल्मों में आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन ये बातें महज सपना साबित हुईं। उन्हें जम कर संघर्ष करना पड़ा। कई बार सिर्फ चने खाकर बेंच पर सोकर उन्हें रात बितानी पड़ी। फिल्म निर्माताओं के दफ्तर में चक्कर लगाने के लिए वे मीलों पैदल चलते थे ताकि पैसे बचा सके और उससे कुछ खा सके। एक बार धर्मेन्द्र के पास भोजन खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। थके-हारे वे अपने रूम पहुंचे जहां टेबल पर उनके रूम पार्टनर का ईसबगोल का पैकेट रखा हुआ था। भूख मिटाने के लिए धर्मेन्द्र ने पूरा ईसबगोल खा लिया। सुबह हालत खराब हो गई और डॉक्टर के पास उन्हें ले जाया गया। डॉक्टर ने सारा माजरा सुन कहा कि इन्हें दवा की नहीं भोजन की जरूरत है। कुछ संघर्ष कर रहे साथियों ने जैसे तैसे खाने की व्यवस्था की और कुछ खाकर हालत ठीक हुई। इसके बाद काफी संघर्ष चलता रहा फिर किसी तरह से अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे (1960) से धर्मेन्द्र ने अपने करियर की शुरुआत की। हिंगोरानी परिवार का धर्मेन्द्र ने ताउम्र एहसान माना और उनकी कई फिल्मों में काम करने के बदले नाममात्र का पैसा लिया। माला सिन्हा, नूतन, मीना कुमारी जैसी उस दौर की नामी हीरोइन के साथ धर्मेन्द्र ने काम किया। धर्मेन्द्र का डील-डौल पहलवानों जैसा था। जिसको देख कई निर्माताओं ने उन्हें अभिनय छोड़ अखाड़े जाने की सलाह दी। कइयों ने कहा कि पहलवान, गांव लौट जाओ। फूल और पत्थर धर्मेन्द्र के करियर की पहली बड़ी हिट थी। इसमें उन्होंने शर्टलेस होकर दर्शकों को चौंका दिया, लेकिन इसके लिए उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी। फूल और पत्थर की शूटिंग के दौरान फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी से उनकी नजदीकियां चर्चा का विषय रहीं। मीना कुमारी के साथ रहते हुए उन्हें शायरी का शौक भी लगा और उन्हें सैकड़ों शेर याद हैं। आजकल वे शायरी भी करते है। एक किताब भी उनकी प्रकाशित हुई है।
धर्मेन्द्र और मीना कुमारी की नजदीकियों से मीना के पति कमाल अमरोही नाराज हुए। वर्षों बाद उन्होंने धर्मेन्द्र को लेकर रजिया सुल्तान बनाई। एक दृश्य में उन्होंने धर्मेन्द्र का मुंह काला करवाया। कहा जाता है कि उन्होंने इस तरह का सीन जानबूझकर रख धर्मेन्द्र से बदला लिया। धर्मेन्द्र को भले ही एक्शन हीरो के रूप में जाना जाता है, लेकिन धर्मेन्द्र ने कई हास्य और रोमांटिक फिल्में भी की हैं। हिंदी फिल्म इतिहास के सबसे खूबसूरत हीरो में से धर्मेन्द्र एक माने जाते हैं। उनकी सेहत और चेहरे की चमक देख महान अभिनेता दिलीप कुमार ने एक बार कहा था कि वे अगले जन्म में धर्मेन्द्र जैसी शख्सियत पाना चाहते हैं। दिलीप कुमार की धर्मेन्द्र बेहद इज्जत करते थे। वे उन्हें अपना बड़ा भाई मानते थे। और अक्सर दिलीप कुमार के पैरों में बैठते थे। दिलीप कुमार से मिलने के लिए वे नियमित अंतराल से उनके बंगले पर जाते रहते थे। खाना भी साथ ही खाते थे। गोविंदा फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। जब गोविंदा की पत्नी गर्भवती थीं तब उन्होंने अपनी पत्नी को धर्मेन्द्र का फोटो दिया था ताकि उनका होने वाला बच्चा धर्मेन्द्र की तरह खूबसूरत हो। यह बात धर्मेन्द्र को पता चली तो उनकी आंखों से आंसू आ गए। रितिक रोशन भी धर्मेन्द्र के फैन हैं। बचपन में उनके कमरे में धर्मेन्द्र का बड़ा पोस्टर लगा हुआ था। कुछ वर्ष पहले रितिक के मस्तिष्क की सर्जरी हुई थी। ठीक होने के बाद सबसे पहला फोन उन्हें धर्मेन्द्र का ही आया था। सलमान खान के भी प्रिय हीरो धर्मेन्द्र हैं। धर्मेन्द्र भी कई बार कह चुके हैं कि सलमान और उनमें कई समानताएं हैं और वे भी जवानी के दिनों में सलमान की तरह हुआ करते थे। सलमान खान की फिल्म प्यार किया तो डरना क्या में काम करने के बदले में धर्मेन्द्र ने एक पैसा नहीं लिया। फिल्म का लंबा आउटडोर शेड्युल था। सलमान के पिता सलीम खान ने अपने बेटों से कहा कि वे धर्मेन्द्र का विशेष ध्यान रखें। आने जाने का भी पैसा धर्मेन्द्र ने अपना ही खर्च किया था। 2004 में धर्मेन्द्र ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट से बीकानेर से चुनाव लड़ा था और विजयी हुए थे। धर्मेन्द्र की पहली शादी मात्र 19 वर्ष की उम्र में प्रकाश कौर से हुई। धर्मेन्द्र ने अपनी पत्नी को मीडिया से सदैव दूर रखा। धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी की जोड़ी बॉलीवुड इतिहास की प्रसिद्ध जोडिय़ों में से एक है। दोनों ने लगातार कई सुपरहिट फिल्में दी। लगातार हेमा मालिनी के साथ काम करते हुए गरम धरम ड्रीमगर्ल को दिल दे बैठे। उस समय हेमा के पीछे संजीव कुमार और जीतेन्द्र जैसे अभिनेता भी थे, लेकिन इनको पछाड़ कर धर्मेन्द्र ने बाजी मार ली और हेमा को अपना बना लिया। कहा जाता है कि जीतेन्द्र और हेमा शादी करने वाले थे तब धर्मेन्द्र ने जीतेन्द्र की दूसरी गर्लफ्रेंड को इस बारे में बता दिया और शादी रूकवा दी। शोले में वे ठाकुर का किरदार निभाना चाहते थे जबकि शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी चाहते थे कि धर्मेन्द्र, वीरू का रोल निभाए। धर्मेन्द्र नहीं माने तो रमेश ने धमकाते हुए कहा कि संजीव कुमार को वीरू बना दूंगा जो कि हेमा मालिनी का हीरो है। धमकी रंग लाई और धर्मेन्द्र फौरन वीरू का रोल निभाने के लिए तैयार हो गए। शोले की शूटिंग के दौरान रोमांटिक सीन में धर्मेन्द्र जानबूझ कर गलती करते थे ताकि हेमा के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिले। वे स्पॉट बॉय को भी गलती करने के पैसे देते थे। ये बात यूनिट के बहुत लोग जानते थे। रमेश सिप्पी ने एक बार मुझसे बात करते हुए बताया था कि अगला सीन और मजेदारी से करते थे धर्मेन्द्र। इसलिए मैं देखकर अनदेखा कर देता था। धर्मेन्द्र ने हेमा से शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन किया और इस्लाम अपनाया। केवल शादी करने तक ही ये लागू रखा। बाद में वापस हिन्दू धर्म से ही सारे कार्य किए। धर्मेन्द्र ने अपने लंबे करियर में तमाम नामी निर्देशकों के साथ काम किया। जिनमें बिमल रॉय, ऋषिकेश मुखर्जी, यश चोपड़ा, बीआर चोपड़ा, रमेश सिप्पी, मनमोहन देसाई जैसे दिग्गज शामिल हैं। धर्मेन्द्र को टाइम्स मैगजीन ने दुनिया के दस खूबसूरत पुरुषों में जगह दी थी। 80 और 90 के दशक में धर्मेन्द्र ने एक्शन भूमिकाएं निभाईं और उनके द्वारा बोला गया संवाद कुत्ते तेरा खून पी जाऊंगा बहुत मशहूर हुआ। पहली पत्नी से धर्मेन्द्र को दो बेटियां (विजयेता और अजीता) तथा दो बेटे (सनी और बॉबी) हैं। दूसरी पत्नी से उन्हें दो बेटियां (ईशा और आहना) हैं। बॉबी देओल ने तो अपने एक बेटे का नाम धरम रखा है।
चार बार फिल्मफेअर पुरस्कार के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी, एक बार श्रेष्ठ सहायक अभिनेता की श्रेणी और श्रेष्ठ कॉमेडियन की श्रेणी में धर्मेन्द्र का नामांकन हुआ, लेकिन उन्हें कभी यह पुरस्कार हासिल नहीं हुआ। उन्होंने फिल्मफेअर लाइफटाइम अचिवमेंट अवॉर्ड्स के दौरान कहा कि कई बार उन्हें इस उम्मीद के साथ नया सूट सिलवाया कि अवॉर्ड मिलेगा, लेकिन नहीं मिला। इस अवार्ड प्रोग्राम में धर्मेन्द्र ने अपने दिल के अंदर दबी हुई बात जब जबान पर लाई तब दिलीप कुमार ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की। पर धरम जी तो धरम जी है अपने बात कहे बिना कैसे चले जाते। मुझे याद है उस प्रोग्राम में दिलीप साहब को कहा था यार दिल की बात तो कहने दो तब दिलीप कुमार एकदम चुप हो गए थे। ये बात अलग है धर्मेन्द्र तब अपने पूरे मुड और मस्ती में थे। धर्मेन्द्र को बॉलीवुड का हीमैन, एक्शन किंग और गरम धरम कहा जाता है।
हीरो के रूप में धर्मेन्द्र ने लंबी पारी खेली। एक दौर ऐसा भी था जब बाप-बेटे दोनों हीरो के रूप में आते थे और धर्मेन्द्र अपने बेटे से कही आगे थे। सनी की हीरोइनों (अमृता सिंह, डिम्पल कपाडिय़ा, श्रीदेवी, जया प्रदा) के भी वे हीरो बने। मल्टीस्टारर फिल्मों से धर्मेन्द्र ने कभी परहेज नहीं किया और तमाम स्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर की। 70 के दशक में वे सबसे महंगे सितारों में से एक थे। शालीमार और रजिया सुल्तान जैसी महंगी फिल्मों के बुरी तरह फ्लॉप होने पर धर्मेन्द्र का करियर खत्म मान लिया गया था, लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी की। एक अध्ययन के अनुसार हाइएस्ट ग्रासिंग स्टार ऑफ ऑल टाइम की लिस्ट में धर्मेन्द्र का नंबर चौथा है। 1987 में 52 वर्ष की उम्र में धर्मेन्द्र की 11 फिल्में रिलीज हुईं जिसमें से 7 सफल रहीं। गुलजार ने धर्मेन्द्र को लेकर देवदास फिल्म आरंभ की थी, जो कुछ दिनों की शूटिंग के बाद बंद हो गई। धर्मेन्द्र ने अपने लंबे करियर में कई हिट फिल्में दी और देश-विदेश में फैले अपने करोड़ों प्रशंसकों का अपनी फिल्मों से मनोरंजन किया। शराब धर्मेन्द्र की कमजोरी रही है और शराब को लेकर उनके कई किस्से हैं। कई अपनी साथी हीरोइनों को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेते थे। जिससे बाद में कई उलझने पैदा होती थी। धर्मेन्द्र ने कुछ बी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया है। जब आलोचना बेटे सनी देओल तक पहुंची तो सनी के कहने पर उन्होंने इस तरह की फिल्मों में काम करना बंद कर दिया। डांस हमेशा धर्मेन्द्र की कमजोरी रहा है। वे गानों में अपनी स्टाइल से डांस करते थे। उनके कुछ सिग्नेचर मूव्ज़ है जिसकी नकल कई सितारों ने की है। मैं जट यमला पगला दीवाना में उनका यह डांस देखते ही बनता है। अपने दोनों बेटों, सनी और बॉबी, के साथ धर्मेन्द्र का खास रिश्ता है। प्यार और एकता की मिसाल है यह परिवार जिसके रिश्ते की मजबूत दीवार में कभी दरार नहीं देखी गई। धर्मेन्द्र ने अपने बेटों के साथ अपने, यमला पगला दीवाना और यमला पगला दीवाना 2 में काम किया है।
हीमैन अपने वक्त में जितने अपनी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहते थे उतने ही वह अपनी निजी जिंदगी के कारण भी सुर्खियों में छाए रहते हैं। धर्मेंद्र उन दिनों मीना कुमारी के साथ अफेयर को लेकर काफी चर्चा में बने रहते थे। कहा जाता है कि मीना कुमारी और कमाल अनरोही के तलाक की वजह भी धर्मेंद्र ही थे।
धर्मेन्द्र के ऐसे कई और किस्से रहे कि वे स्वभाव से रोमांटिक आदमी ही है। चाहे वो जयाप्रदा हो, शिल्पा शेट्टी, अनीता राज, अनेकों हीरोइन जिनसे उनके संबंध रहे। मीडिया भी धर्मेन्द्र की खबर छापने में हमेशा डरता था। एक बार मुंबई में एक फिल्मी पत्रकार को अपने भांजे विक्रम के साथ घर पर जाकर जमकर मारा था। तब इसकी चर्चा जोरों पर रही। यहां तक की कई फिल्मी रसाले भी धर्मेन्द्र के किस्से कहानियां छापने में डरते थे। ये एक हकीकम बात है फिल्म फेयर में हमेशा उनके साथ पक्षपात होता रहा। उन्हें जानबूझकर हमेशा अवार्ड के नजदीक लाकर पीछे धकेल दिया जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था कि धर्मेन्द्र से न तो कोई स्टेज परफार्म कराई जा सकती थी और ना ही कुछ पैसों की उम्मीद की जा सकती थी। वो बन्दा अपनी मस्ती में मस्त रहता था। पर जब मौका मिला तब उसने फिल्म फेयर की पूरी बैन्ड बजाई। धर्मेन्द्र के डायलाग भी जबर्दस्त रहते थे लोगों की जुबान पर हमेशा चढ़े रहते थे। कई फिल्में कमजोर होने की वजह से भी धर्मेन्द्र की वजह से चल जाती थी। ऐसा हीरो और कोई नहीं रहा। ऐसे कई किस्से और भी है जिन्हे समय-समय पर आपके बीच लाता रहूंगा। मैं हर चीज का ध्यान रखते हुए कुछ पारिवारिक किस्सों पर पर्दा ही रखता हूं। वो मेरी मर्यादाओं में आता है।