भारतीयों का बदला मिजाज, एक करोड़ से ज्यादा के महंगे फ्लैट्स खरीद रहे लोग

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TIO नई दिल्ली

– इस साल छह महीनों में देश के आठ बड़े शहरों में 1,71,000 से ज्यादा घर फ्लैट
NANDINI PARSAINANDINI PARSAI 

– इस साल छह महीनों में देश के आठ बड़े शहरों में 1,71,000 से ज्यादा घर फ्लैट
भारतीय रियल एस्टेट बाजार इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश में घर तो खूब बिक रहे हैं, लेकिन इन्हें खरीदने वालों का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। कभी बजट और सस्ते घर भारतीयों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब वे इनसे दूरी बना रहे हैं। आज वे 1 करोड़ से महंगे फ्लैट्स आंख मूंदकर खरीद रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले छह महीनों में बिके 100 में से 54 घरों की कीमत 1 करोड़ से ज्यादा थी। एक साल पहले यह आंकड़ा 49 था। दूसरी ओर 50 लाख से कम कीमत वाले यानी अफोर्डेबल घरों की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट आई है। इस आंकड़े ने साफ कर दिया है कि प्रॉपर्टी मार्केट की कमान अब प्रीमियम और लग्जरी खरीदारों के हाथ में है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले छह महीनों में देश के आठ बड़े शहरों में 1,71,000 से ज्यादा घर बिके हैं। बिक्री का यह आंकड़ा भले ही पिछले साल जैसा ही है, लेकिन बाजार के अंदर खरीदारों का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। इसी अवधि में 1,87,000 से ज्यादा नए घर भी लॉन्चह हुए यानी जितने घर बिके उससे करीब 16,000 से ज्यादा नए घर बाजार में आ गए। इससे बिना बिके घर अब बढ़कर 5,25,000 यूनिट्स से ज्यादा हो चुके हैं। लग्जरी सेगमेंट की रफ्तार तो अब सारी सीमाएं लांघ रही है। 20 करोड़ से 50 करोड़ वाले ‘अल्ट्रा लग्जरी’ घरों की बिक्री में पूरे 105फीसदी का बंपर उछाल आया। 2 करोड़ से 5 करोड़ वाले घरों की बिक्री में 19फीसदी का उछाल आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश की आर्थिक राजधानी मुंबई अभी भी भारत का सबसे बड़ा हाउसिंग मार्केट बनी हुई है। वहीं, आईटी हब बेंगलुरु में घरों की बिक्री की रफ्तार सबसे तेज है। दूसरी ओर देश के बड़े बाजार दिल्ली-एनसीआर को तगड़ा झटका लगा है। आसमान छूती कीमतों की वजह से एनसीआर में घरों की बिक्री में 7फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। रियल एस्टेट के ये आंकड़े इस बात की तस्दीेक तो कर रहे हैं कि प्रॉपर्टी बाजार कमजोर बिल्कुल नहीं है। हां, यह बदल जरूर रहा है। बाजार में पैसा है, प्रीमियम डिमांड है और बड़े खरीदार भी हैं, लेकिन सबसे बड़ा और अहम सवाल यह है कि क्या भारत का हाउसिंग मार्केट वाकई मजबूत हो रहा है, या फिर घर खरीद सकने वाले लोगों का दायरा छोटा और सीमित होता जा रहा है?