मारे गए आईएसजेके जातंकवादियों के निशाने पर थी अमरनाथ यात्रा

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में शुक्रवार को मारे गए 4 आतंकवादियों के निशाने पर 28 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा भी थी। मारे गए आतंकियों का रिश्ता इस्लामिक स्टेट जम्मू ऐंड कश्मीर (आईएसजेके) से था। मारे गए आतंकियों में आईएसजेके का चीफ दाऊद अहमद सोफी भी शामिल है।
Amarnath yatra was on target for ISJK militants killed
खबरों के मुताबिक इस बात की आशंका थी कि इन आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा में हमले की योजना बनाई हो क्योंकि इन्हें तीर्थयात्रा के मार्ग में पड़ने वाले खिर्रम गांव में छिपाया गया था। दरअसल, आईएसजेके तहरीक-उल-मुजाहिदीन का पुनर्निर्मित रूप है। सूत्रों की मानें तो यह 90 के दशक से शुरूआती दिनों से घाटी में ऐक्टिव था लेकिन बाद कई वर्षों तक यह निष्क्रिय भी पड़ा रहा। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य का दावा है कि आईएसजेके के केवल 8-10 सक्रिय आतंकी हैं, जिसमें 6 को मार दिया गया है।

आईएस का खौफनाक मॉडल, आईएसजेके की कोशिश
आईएसजेके इस्लामिक स्टेट द्वारा बताए मॉडल को अपनाते हुए पूरे विश्व में उसके द्वारा तैयार किया गया जिहाद कायम करना चाहता है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आईएस और जम्मू-कश्मीर के बीच कोई खास रिश्ता है। पिछले आतंकी हमलों के बाद आईएस नाम के लिए दावा किया जा रहा था और आईएसजेके ने आईएस को जम्मू-कश्मीर के युवाओं के बीच चर्चित करने की कोशिश की।’

मुगीस अहमद मीर को दफनाते वक्त नारेबाजी
जम्मू-कश्मीर सरकार घाटी में युवाओं के बीच बढ़ते आईएस के आकर्षण को पहचानने में नाकामयाब रही। गौरतलब है कि पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में तहरीक-उल-मुजाहिदीन के आतंकी मुगीस अहमद मीर को दफनाते समय लोगों ने ‘ना हुर्रियतवाली शरीयत, ना हुर्रियतवाली आजादी, कश्मीर बनेगा दारुल इस्लाम’ जैसे नारे लगाए थे।

सुरक्षाबलों ने श्रीनगर के बाहरी इलाके जकूरा में मुठभेड़ के दौरान मुगीस अहमद मीर को मार गिराया था। मुगीस के समर्थकों ने उसके शव को इस्लामिक स्टेट के झंडे में लपेटकर अंतिम यात्रा निकाली थी। इस नारेबाजी से सूबे में इराक और सीरिया में सक्रिय खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रभाव के संकेत मिले। हालांकि, राज्य सरकार ने उस दौरान आईएस का कोई प्रभाव होने की बात से साफ तौर पर इनकार कर दिया था।