फिर जून में सुलगा मंदसौर,,,

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ब्रजेश राजपूत की ग्राउंड रिपोर्ट

सोचा तो था मंदसौर किसान गोलीकांड पर न्यायिक जांच कमेटी की रिपोर्ट, उसकी बेदम सिफारिशों और अब सस्पेंशन से हाल ही में बहाल किये गये तत्कालीन एसपी कलेक्टर के अलावा मंदसौर में अपने पर क्या गुजरी इन घटनाओं को मिलाजुलाकर कुछ बढिया किस्सा लिखूंगा। मगर लिख तो मंदसौर पर ही रहा हूं क्योंकि शिवना के किनारे बसा भगवान पशुपतिनाथ और मंदोदरी का मायका माने जाने वाला ये शहर फिर खबरों में है मगर फिर बुरे कारणों के कारण।
Mandsaur, then again, in June
26 जून की रात में मंदसौर से हमारे सहयोगी मनीष पुरोहित का फोन आया और उसने सहमते हुये बताया कि एक छोटी बच्ची से बलात्कार का मामला है बच्ची गंभीर है उसे इंदौर भेज दिया है पुलिस ने एक दो लोगों को उठाया है सुबह तक सारी तस्वीर साफ होगी। मगर अगले दिन तक सात साल की इस लडकी के साथ हुयी दरिंदगी की जो जानकारियां सामने आयीं वो दिल दहला देने वाली थीं।

हांलाकि पुलिस ने इस बीच में आरोपी इरफान को गिरफतार कर रिमांड पर ले लिया था और पता चला कि ये पेशेवर अपराधी और शराबखोरी करने वाला व्यक्ति है जिसने शराब पीकर उस मासूम को स्कूल से लौटते में शिकार बनाया। फिर क्या था इस घटना ने पूरे मंदसौर को सुलगा दिया। शहर में प्रदर्शन होने लगे जिनमें बडी संख्या में महिलाएं सडकों पर उतरीं। इंदोर से मंदसौर इस घटना को कवर करने पहुंचे हमारे सहयोगी अजय दुबे ने बताया कि मैं हैरान हूं कि कैसे इतने सारे लोग सडकों पर उतर आये हैं। हर थोडी देर में समाज का कोई ना कोई तबका घटना के विरोध में पुलिस प्रशासन को ज्ञापन दे रहा है। उधर पुलिस भी इतने सारे ज्ञापन लेकर हैरान है। तकरीबन हर समाज के लोग एसपी कलेक्टर को ज्ञापन देकर फोटो खिचवा रहे है।

इस बीच में इरफान के साथी आसिफ को भी गिरफतार कर लिया तो हैवानियत की और खौफनाक तस्वीर सामने आयी कि ये सुनियोजित तरीके से किया गया सामूहिक बलात्कार है। जिसे इन जानवरों ने अंजाम दिया। जिले के एसपी मनोज सिंह बेहद सहज मगर सतर्क पुलिस अफसर हैं। उनको जब फोन कर हमने इस मामले में पुलिस की सफल कार्रवाई की सराहना की तो उन्होने नयी परेशानी ही सुनाई। पुलिस को इस घटना में आरोपी को पकड कर राहत की सांस नहीं ले पा रही है क्योंकि पूरे शहर में तनाव का माहौल है।

कुछ लोग इस घटना की आड में माहौल बिगाड कर समाजों के बीच में बंटवारा कर लडवाने की फिराक में है जिसके लिये रातों में अलग अलग संगठनों के दफतरों में जाकर दबिश देनी पड रही है। यही लोग है जो टकराव की घटना को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं तो सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। कुछ कुछ घंटों में ही वाटसअप पर झूठे संदेश चलने लगते हैं लडकी की मौत कल शहर बंद। अंजान अस्पतालों के आईसीयू के फोटो और किसी भी क्षत विक्षत फोटो लगाकर बताया जाता कि नन्ही बालिका इस बुरे हाल में हैं। ऐसे में इन झूठो संदेशों का जबाव देना और इनको चलने से रोकना पुलिस के लिये बडी मुष्किल काम हो रहा है। उधर इंदौर में इस बहादुर बालिका को वक्त पर इलाज मिलने के कारण हालत बेहतर हो रही है। सीएम शिवराज सिंह बच्ची की हालत पर नजर रखे हैं। उसे सामान्य होने में अब महीनों लगेंगे उधर सरकार मुंबई के बाम्बे अस्पताल से भी विशेषज्ञ डाक्टरों को बुला रही है जिससे बालिका अपने आगे की जिंदगी सामान्य जी सके।

हांलाकि इस दुखद घटना की आड में राजनीतिक श्रेय लूटने की कोशिशें हुयीं। एमवाय अस्पताल में आये बीजेपी के सांसद और विधायक का गैरजिम्मेदाराना रवैया भी सबने देखा। अब इंदौर और भोपाल की सडकों पर कैंडल मार्च निकलने लगे हैं। दरअसल सबसे आसान है सोशल मीडिया पर भडास और गुस्सा निकालना उससे थोडा मुष्किल है सडक पर उतर कर कैंडल मार्च कर प्रदर्शन करना मगर इस सजावटी बनावटी कामों से दूर जो सबसे कठिन काम है वो है हम अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितने सजग हैं इसकी जानकारी लेना।

इसी घटना में मुर्दाबाद के नारे लगाने वालों ने ये नही देखा कि स्कूल छूटने पर बच्ची को लेने जब उसके परिजनों को देरी हो गयी तो वो क्यों किसी गैर के साथ गयी ये किसी ने नहीं देखा। देखने वाले चौकीदार और शिक्षक स्कूल के गेट से गायब थे। स्कूल के गेट पर लगा सीसीटीवी बंद पडा था। भला हो स्कूल से दो सौ मीटर दूर की दुकान का जिसके फुटेज के आधार पर आरोपी पकडाया मगर ये फुटेज भी मिला बहुत देरी से। यदि स्कूल का कैमरा चल रहा होता तो आरोपी जल्दी पकड में आता। शराब के नषे में दुप्कर्म करने के बाद आरोपी ने मासूम का गला रेता और उसे मरा हुआ जान कर झाडियों में फेंक कर चल दिये।

यदि आरोपियों को अपने पकडे जाने की जरा सी भी आशंका होती तो वे शहर से दूर भाग चुके होते। खैर इस जघन्य कांड के आरोपियों को सरेआम चौराहे पर फांसी देने की मांग हो रही है जो संभव नहीं है। हमारे देश का कानून ऐसी तालीबानी सजाओं को मान्यता नहीं देता ये हमें अपने गुस्से को दूर रखकर सोचना होगा और ठंडे दिमाग से उन व्यवस्थाओं को लागू करना होगा जिससे हमारी बेटियां स्कूल से लेकर बाजार और घरों में भी सुरक्षित रह सकें।

एबीपी न्यूज, भोपाल