नई दिल्ली। संसद में गुरुवार को एक बार फिर संग्राम देखने को मिल सकता है। एक तरफ तो असम का राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का मामला गरमाया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार एक और अहम संशोधन बिल पेश करने जा रही है। गुरुवार को लोकसभा में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाला बिल नए सिरे से पेश किया जाएगा। मोदी सरकार इस बिल के माध्यम से देश के पिछड़े वर्ग को लुभाने की कोशिश में जुटी हुई है। यह बिल कितना अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी ने अपने सांसदों को तीन लाइन का विप जारी किया है।
The bill will be presented by the Narendra Modi government to give constitutional status to the OBC
इसके अलावा मोदी सरकार इस बार संशोधन बिल पर आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से भी संपर्क कर रही है। पिछली बार यह बिल लोकसभा में तो पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। आपको बता दें कि यह संविधान संशोधन से जुड़ा बिल है जिसे पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत चाहिए। इस हिसाब से सरकार के पास लोकसभा में तो बहुमत है लेकिन राज्यसभा में उसकी स्थिति कमजोर है।
विरोध को देखते हुए सरकार ने नए बिल में किए बदलाव
पिछली बार पिछड़ा आयोग बिल को राज्यसभा से पास कराने के चक्कर में सरकार की किरकिरी हो चुकी है। राज्यसभा ने पिछले साल इस बिल पर विपक्ष के संशोधनों को मंजूरी मिल गई थी। इस बार नए सिरे से बिल पेश करते हुए मोदी सरकार न इसमें अहम बदलाव किए हैं। अब इसमें महिला सदस्य को भी शामिल कर लिया गया है।
इसके अलावा विपक्षी दलों ने इसमें राज्यों के अधिकारों में दखल की आशंका को लेकर आपत्ति जताई थी। अब सरकार ने इसे दूर करने की कोशिश की है। ओबीसी तबके में जातियों को जोड़ने या हटाने के लिए राज्यपाल से परामर्श लेने के प्रस्ताव को हटा लिया गया है। अब राज्य सरकारों से ही परामर्श लेने का प्रस्ताव है।
आपतो बता दें कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 1993 में किया गया था। फिलहाल इसके पास सीमित अधिकार हैं। यह आयोग पिछड़ी जातियों को ओबीसी की केंद्र सरकार की सूची में शामिल करने या बाहर निकालने की ही सिफारिश कर सकता है। फिलहाल ओबीसी समुदाय की शिकायतों के निपटारे और उनके हितों की रक्षा के लिए अनुसूचित जाति आयोग ही काम करता है।
संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के बाद इसके तहत पिछड़ी जातियों की समस्याओं का निपटारा किया जा सकेगा। इस विधेयक के पारित होने पर पिछड़ा आयोग ओबीसी सूची में शामिल जातियों की समस्याओं को सुन सकेगा और उनका समाधान कर सकेगा।

