नई दिल्ली। पानी को लेकर भारत-पाकिस्तान के विवाद में अब अफगानिस्तान का ऐंगल भी जुड़ने वाला है। भारत ने काबुल नदी बेसिन पर डैम बनाने में अफगानिस्तान सरकार की मदद करने का निर्णय लिया है। भारत ने पिछले हफ्ते एक बैठक में अफगान सरकार को काबुल के पास शहतूत डैम बनाने में मदद पर सहमति जताई है। इस परियोजना को लेकर पाकिस्तान में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उसका कहना है कि इससे उसके यहां इन नदियों के जल प्रवाह में कमी आएगी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्रों में भारत की फंडिंग वाली परियोजनाओं का विरोध किया है।
India will help Afghan government to create mulberry dam, Bukhlaya Pakistan
उसने दावा किया है कि इस डैम से पाकिस्तान में जल का प्रवाह कम हो जाएगा। पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में सलमा डैम पूरा करने के दो साल बाद भारत इस प्रॉजेक्ट में मदद करने जा रहा है। सलमा डैम वहां के बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स में से एक है। 2001 से युद्ध का सामना कर रहे अफगानिस्तान को रीकंस्ट्रक्शन में इससे मदद मिली। मामले के जानकार एक सूत्र ने कहा कि जॉइंट वर्किंग ग्रुप आॅन डिवेलपमेंट को-आॅपरेशन की दूसरी मीटिंग के मौके पर काबुल में पिछले सप्ताह दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की मुलाकात के दौरान ही इस पर सहमति बन गई थी।
तब भारत ने शहतूत डैम के निर्माण में मदद करने के अपने निर्णय के बारे में अफगानिस्तान को बताया था। काबुल नदी हिंदूकुश पर्वत के संगलाख क्षेत्र से निकलती है और काबुल, सुरबी और जलालाबाद होते हुए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा चली जाती है। अफगानिस्तान की राजधानी के पास चहर असियाब जिले में काबुल नदी की एक सहायक नदी पर शहतूत डैम के निर्माण का प्रस्ताव है। शहतूत डैम के निर्माण में भारत की मदद की योजना का पाकिस्तान में विरोध शुरू हो गया है। लंबे समय से वह अफगानिस्तान के रीकंस्ट्रक्शन में भारत की भूमिका से नाराज है।
पाकिस्तान का कहना है कि प्रस्तावित शहतूत डैम और इसकी सहायक नदियों पर इस तरह के प्रॉजेक्ट से उसके यहां जल का बहाव कम हो जाएगा। पाकिस्तान, अफगानिस्तान पर काबुल और इसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे के लिए द्विपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बना चुका है। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार का इस पर पॉजिटिव रुख नहीं है। शहतूत डैम बनाने पर करीब 30 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। अफगानिस्तान की राजधानी के आस-पास खैराबाद और चहर असियाब में 4,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने के अलावा, यह काबुल के 20 लाख से अधिक लोगों को पेयजल प्रदान करने में मदद करेगा।

