भारी सुरक्षा में रहेंगे मुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद-विधायक , -जिलाधिकारी स्थिति को देखते हुए लगाएं धारा 144

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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले पर हमले के बाद प्रदेश में जमकर राजनीति हो रही है, लेकिन इस बीच सरकार ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत सभी प्रमुख नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी है। अब मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक अन्य जनप्रतिनिधियों को विशेष सुरक्षा मुहैया होगी।
Keep in mind the Chief Minister, the minister and the MP-MLA, -holding the status of the Collector in high security Section 144
जिला कलेक्टर एवं एसपी स्थिति को देखते हुए जिले में शाति व्यवस्था कायम करने के लिए धारा 144 लागू कर सकते हैं, एवं इंटरनेट सेवा बंद करा सकते हैं। इधर एससी-एसटी एक्ट के विरोध में कल से शुरू हो रहे बंद के अभियान को देखते हुए ग्वालियर-चंबल के शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड एवं मुरैना में धारा 144 लागू कर दी गई है।

एससी-एसटी एक्ट के विरोध में आज ग्वालियर में विशाल सभा हो रही है। जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा संगठन शामिल हो रहे हैं। कथाकार देवकीनंदन ठाकुर भी इस आंदोलन में कूद पड़े हैं। ग्वालियर के फूलबाग मैदान पर हो रही सभा में 10 हजार से ज्यादा लोगों के भीड़ उमड़ने की संभावना है।

ध्यान बांटने की काशिश है जूता-चप्पल: त्रिवेदी
सपाक्स के संरक्षण हीरालाल त्रिवेदी ने हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले पर पत्थर फेंके जाने और जूता फेंके जाने की घटना को कांग्रेस-भाजपा का आंदोलन से ध्यान भटकाने का षड्यंत्र करार दिया है। त्रिवेदी ने कहा कि दोनों ही दल एसटी-एससी एक्ट को लेकर घिरे हुए हैं। इनसे सपाक्स वर्ग बेहद नाराज हैं। इस तरह की घटनाएं सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए हैं।

विशेष घेरा में रहेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल से फिर जनआशीर्वाद यात्रा पर निकल रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री विशेष सुरक्षा घेरे में रहेंगे। अब आगे की यात्राओं में मुख्यमंत्री को विशेष सुरक्षा दी जाएगी। वे नेताओं से घिरे नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षाकर्मी उनके आसपास रहेंगे। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा को रिव्यू किया है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री, सांसद, मंत्री एवं विधायकों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। राज्य शासन की ओर से पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि यदि विधायक अतिरिक्त सुरक्षा की मांग करता है तो दी जाए।

नेताओं ने संसद में बैठकर समाज बांट दिए: देवकीनंदन
कथाकार देवकीनंदन ठाकुर देश के सभी राजनीतिक दलों के रवैए से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि देश के जो नेता हैं, वो समाजों को आपस में बांटने की राजनीति कर रहे हैं। संसद में इस कानून का विधेयक मंजूर हो गया और कोई भी एक नेता इसका विरोध करते हुए सामने नहीं आया। सभी ने मौन धारण कर सामाजिक ढांचे के विपरीत इस कानून को स्वीकार क्यों कर लिया?

नेताओं को इसका जवाब जरूर देना चाहिए। यदि अभी भी ऐसी विसंगतियों को दूर कर सामाजिक ढांचा व न्याय व्यवस्था को नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में विभिन्न समाजों के लोग एक-दूसरे के साथ बैठना भी पसंद नहीं करेंगे। संसद में मौन रहकर सभी ने इस एक्ट को पास होने दिया। क्या इन सभी नेताओं को सिर्फ एससी/एसटी वर्ग का ही वोट चाहिए? यदि ऐसा है तो राजनीतिक दल घोषणा कर दें, कि उन्हें सवर्ण व दूसरे वर्गों के वोट नहीं चाहिए।