नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरावट ने रिजर्व बैंक समेत सरकार की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 72.67 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बीते कई महीनों से भारतीय करंसी ने गिरावट के नए-नए रेकॉर्ड बनाए हैं और फिलहाल यह अपने सबसे निचले स्तर पर है।
Worries about the new records, the RBI and the government created by the decline in Indian currency
रुपये के गिरने से क्या है समस्या
एक्सपोर्ट के गति न पकड़ने के चलते हम बहुत ज्यादा डॉलर नहीं कमा पा रहे हैं। लेकिन, कच्चे तेल का इंपोर्ट बढ़ने की वजह से हमें अधिक डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं। क्रूड का इंपोर्ट बिल एक साल में 76 पर्सेंट तक पढ़ गया है। इसलिए इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के बीच का अंतर यानी चालू खाता घाटा 5 साल के उच्चतम स्तर पर है। आरबीआई के पास फिलहाल बड़े पैमाने पर डॉलर हैं, लेकिन रुपये की गिरावट को रोकने का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। अप्रैल में यह 426 अरब डॉलर था, जो अब घटकर 400 अरब डॉलर ही रह गया है।
यह हो सकता है समाधान
एनआरआई की ओर से जमा कराई गई विदेशी मुद्रा को अब तक तीन बार (1998, 2000 और 2013 ) आरबीआई ने अपने रिजर्व में इजाफा करने के लिए इस्तेमाल किया है। पहली बार पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद ऐसा किया गया, जब 5 अरब डॉलर जुटाने पड़े। 2013 में आरबीआई ने डिपॉजिट स्कीम में छूट के जरिए 34 अरब डॉलर जुटाए थे ताकि रुपये को रेकॉर्ड गिरावट के स्तर से ऊपर ले जाया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब एक बार फिर से सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है। इसके जरिए सरकार 60 अरब डॉलर जुटा सकती है।

