‘जब बहनें मिलकर चलाती हैं बिजनस तो झगड़ा नहीं होता’

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नई दिल्ली। देश के कई बड़े कारोबारी घरानों में संपत्ति को लेकर झगड़े हो चुके हैं। हाल में इस कड़ी में फोर्टिस ग्रुप के सिंह बंधुओं का नाम जुड़ा है। अंबानी, बजाज, थापर, गोयनका, श्रॉफ और लोढ़ा परिवार में हुए झगड़े आपसी बातचीत के जरिये निपटाए गए थे। इन सभी मामलों में तनातनी भाइयों के बीच हुई थी। वहीं, कुछ कंपनियों की कमान बहनों के हाथों में है, जिसे वे मिलकर चला रही हैं। उनके बीच आपसी विवाद की बहुत कम खबरें आई हैं।
‘When sisters play together, business is not a quarrel’
इस मामले में अपोलो हॉस्पिटल की रेड्डी बहनों की मिसाल दी जा सकती है, जिनमें प्रीता हॉस्पिटल, सुनीता फाइनेंस, शोभना फामेर्सी और इंश्योरेंस बिजनेस जबकि संगीता आईटी बिजनस देखती हैं। चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी की बनाई उत्तराधिकार व्यवस्था के हिसाब से सभी बहनें बारी-बारी से हेड बनेंगी।

फैमिली बिजनस एक्सपर्ट्स का कहना है कि उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दों को हैंडल करते वक्त महिलाएं दूसरों की भावनाओं का ज्यादा ख्याल रखती हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर आगाह भी करते हैं कि बहनों को उत्तराधिकारी बनाने का ट्रेंड कमोबेश शुरूआती दौर में है। हम पारले एग्रो ग्रुप की चौहान बहनों- शॉना, एलिशा और नाडिया का भी उदाहरण ले सकते हैं। शॉना कंपनी की सीईओ हैं और नाडिया जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और सीएमओ जबकि एलिशा डायरेक्टर हैं, जो कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का काम देखती हैं।

अशोक मल्होत्रा का पब्लिशिंग बिजनेस काफी फैला हुआ है और अब उसमें हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट और पेपर मैन्युफैक्चरिंग बिजनस भी शामिल हो गए हैं। उनके कारोबार को उनकी बेटियां मोनिका और सोनिका मल्होत्रा मिलकर संभाल रही हैं। किशोर बियानी की बेटियां अश्नि और अवनि मिलकर काम कर रही हैं और दोनों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं।

कुछ मामलों में बहन-भाई मिलकर कारोबार संभाल रहे हैं। मिसाल के लिए ल्यूपिन के विनीता और नीलेश गुप्ता, एपीजे सुरेंद्र ग्रुप और गोदरेज ग्रुप की कई कंपनियों को परिवार के बच्चे संभाल रहे हैं। कारोबारी घरानों के विवाद में पुरुष और महिलाओं के होने से कुछ फर्क पड़ता है? शॉना चौहान को ऐसा नहीं लगता।

उन्होंने बताया, ‘किसी कंपनी को प्रमोटर फैमिली को खुली बातचीत और भरोसा व सम्मान जोड़े रखता है। हम अच्छे दोस्त हैं और हमारा रिश्ता काफी मजबूत है। हम मकसद के हिसाब से काम करते हैं और गर्मजोशी से करते हैं। कामकाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा दिखाते हैं जिससे बड़े फैसले मिलकर लेने में मदद मिलती है।’

2018 की क्रेडिट सुइस फैमिली 1000 स्टडी के मुताबिक, कारोबारी घरानों की तरफ से चलाई जाने वाली कंपनियों के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। यहां कुल ऐसी कुल 111 जानी-मानी कंपनियां हैं जिनका कुल 839 अरब डॉलर का मार्केट कैपिटलाइजेशन है। चीन में ऐसी 159 और अमेरिका में 121 कंपनियां हैं जिनकी कमान कारोबारी घरानों के हाथ है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2006 के बाद से कारोबारी घरानों की कंपनियों का एवरेज शेयर प्राइस रिटर्न 14% सालाना रहा है, जबकि उनके बराबर की सामान्य कंपनियों का रिटर्न इस दौरान 6% रहा है। भारत में ज्यादातर कारोबारी घरानों में पितृसत्तात्मक व्यवस्था है, इसलिए उनमें परिवर्तन की प्रक्रिया बड़ी सुस्त है। अपोलो हॉस्पिटल्स के संस्थापक प्रताप रेड्डी कहते हैं, ‘औरतों में प्रेम और सहानुभूति होती है, मर्द जिनकी सिर्फ सराहना कर सकते हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि एक दूसरे के प्रति प्रेम, स्नेह और ख्याल रखने से परिवार के रिश्ते मजबूत हुए हैं।’