भोपाल। पिछले चुनावों तक बहुजन समाज पार्टी का फिक्स वोटबैंक रहा है, जो हर चुनाव में बसपा का समर्थन करता रहा है, लेकिन इस बार बहुजन समाज पार्टी का वोटबैंक बिखराव की स्थिति में है। जिसकी वजह यह है कि बसपा से जुड़े नेता अलग-अलग दलों से जुड़ गए हैं ओर नेताओं ने अपने राजनीतिक दल बना लिए हैं। जिसका सबसे बड़ा नुकसान आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा को उठाना पड़ सकता है।
BSP’s vote bank scattered rapidly in MP, divided in many organizations, linked to different political parties
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीम मायावती ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए 15 जिलों में 22 प्रत्याशियों के नाम घोषित किया है। जिन सीटो ंपर बसपा ने प्रत्याशी खड़े किए हैं, ये वही हैं जिन सीटों के लिए बसपा और काग्रेस के बीच गठबंधन की अटकलें चल रही थीं। हालांकि अभी तक गठबंधन नहीं हो पाया है। जिसका खामियाजा चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा बसपा को भगुतना पड़ सकता है।
क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रों में बसपा का वोटबैंक खिसक गया है। इसकी दूसरी वजह भी यह है कि 10 से 15 पहले तक बसपा से जुड़े नेताओं ने अब खुद के राजनीतिक दल बना लिए हैं, कुछ राजनीतिक क्षेत्र छोड़कर दूसरा काम कर रहे हैं। जिनमें से फूलसिंह वरैया, देवाषीश, अर्जुप आर्य ऐसे चेरहे हैं, जिनकी ओर युवा आकर्षित हुआ है। ये सभी चेहरा बसपा से जुड़े रहे हैं। लेकिन इस संगठनों की मांग और प्रदर्शन अलग-अलग हो चुके हैं।
बसपा को उठाना पड़ेगा नुकसान
प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन नहीं होने का नुकसान बसपा को उठाना पड़ सकता है। क्योंकि पिछले पांच साल के भीतर बसपा से जुड़ नेताओं के कई संगठन बन गए हैं। वे सभी चुनाव मैदान में उतरेंगे। जिससे बसपा का वोट बैंक बंटेगा। यदि कांगे्रस से गठबंधन होता तो बसपा का वोटबैंक एकजुट होता। खास बात यह है कि बसपा के प्रभाव वाले क्षेत्र ग्वालियर-चंबल, विंन्ध्य, बुंदेलखंड में बसपा के वोट बैंक में बिखराव की संभावना है।
2 के बाद फैसला लेगा जयस
प्रदेश में आदिवासी युवाओं का संगठन जयस ने भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। जयज के संयोजक डॉ हीरासिंह ने कांग्रेस को 2 अक्टूबर तक गठबंधन या फिर सहमति से प्रत्याशी घोषित करने की चेतावनी दी है। यदि कोई राजनीतिक दल जयस की मांग नहीं मानता है तो फिर जयस खुद चुनाव मैदान में उतरेगा। जयस ने 80 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड?े का ऐलान किया है।

