कथक डांसर को पीएम मोदी का अध्यात्मिक गुरु बताना पड़ा महंगा, क्राइम ब्रांच ने किया अरेस्ट

0
430

नई दिल्ली। कथक डांसर को सरकारी सुविधाएं हासिल करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नाम का इस्तेमाल करना महंगा पड़ा है। खुद को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का डायरेक्टर बताकर यूपी पुलिस से पीएसओ और डीएम से सर्किट हाउस बुक कराने वाले पुलकित मिश्रा उर्फ पुलकित महाराज को क्राइम ब्रांच ने अरेस्ट किया है।
Kathak Dancer was told to be PM Modi’s spiritual master, crime branch did arrest
वह खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का आध्यात्मिक गुरु बताता था। यही नहीं कई मंत्रालयों के फर्जी लेटरहेड भी उसके पास मौजूद थे। इनके जरिए वह विभिन्न राज्यों में वीवीआईपी स्टेटस हासिल करता था। क्राइम ब्रांच ने आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने कोर्ट से आरोपी को पूछताछ के लिए पांच दिन के रिमांड पर लिया है।

डीसीपी जॉय टिर्की ने बताया कि क्राइम ब्रांच को यूपी पुलिस से एक शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि पुलकित मिश्रा उर्फ पुलकित महाराज 1 अप्रैल 2018 को अपने कुछ चेलों के साथ सीतापुर यूपी पहुंचे थे। उन्होंने एसपी से कहा कि वह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के डायरेक्टर हैं, जबकि उनकी बहन पारुल सेक्रटरी है।

एसपी से मांगी सुरक्षा, डीएम से कराई बुकिंग
उन्होंने एसपी से सुरक्षा के लिए पीएसओ उपलब्ध कराने के लिए कहा। वहीं उन्होंने वहां के डीएम से वहां ठहरने के लिए सर्किट हाउस उपलब्ध कराने के लिए कहा। इतना ही नहीं उन्हें वीआईपी की तरह मंदिर आदि के दर्शन भी कराए गए। वहां कुछ दिन ठहरने के बाद वह वापस लौट आए। डीएम ने जब पूरे मामले की जांच की तो पता चला कि संस्कृति मंत्रालय में इस नाम का कोई डायरेक्टर और सेक्रटरी नहीं है।

बड़े नेताओं के साथ पुलकित की तस्वीर
तब अगस्त 2018 में क्राइम ब्रांच को शिकायत दी गई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की छानबीन कर उनके खिलाफ सबूत जुटाए। पुलकित महाराज की बड़े नेताओं के साथ कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं। क्राइम ब्रांच ने साहिबाबाद में कथक स्कूल चलाने वाले पुलकित महाराज को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। फिलहाल उनकी बहन को अरेस्ट नहीं किया गया।

पुलिस ने 5 दिन की रिमांड पर लिया
पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर उसे पूछताछ के लिए पांच दिन के रिमांड पर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वह इससे पहले कुछ अन्य राज्यों में भी इसी तरह से वीआईपी की तरफ सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं। पुलिस उन राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है। एक सवाल के जवाब में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस बारे में उन्हें पीएमओ से कोई शिकायत नहीं मिली।