भोपाल। एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम समाज तो विरोध कर ही रहा था अब मप्र में इस आंदोलन से संत समाज भी जुड़ने लगा है। चार बड़े संतों ने इस संशोधन के खिलाफ न केवल खुलकर बयान दिए हैं बल्कि राज्य और केन्द्र सरकार को भी चेतावनी जारी कर दी है। इनमें कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, ग्वालियर चंबल संभाग में सक्रिय गुरूशरण शर्मा पंडोखर महाराज, मालवा के जाने-माने संत कमल किशोर नागर, महाकौशल और पूरे देश-विदेश में श्रद्धा से पूजे जाने वाले गृहस्थ संत देवप्रभाकर शा ी द्ददा जी शामिल है। सरकार की चिंता है कि यदि संत सड़क पर उतरे तो बड़ी परेशानी हो सकती है।
Against the Atrocity Act, there was a lot of opposition, against which the saint also appeared
इस आंदोलन में सबसे पहले वृंदावन के कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने ग्वालियर में आकर ताल ठोकी। उन्होंने सरकार को तीन महीने का समय दिया है। इसके बाद वे इस आंदोलन में खुलकर सड़क पर उतर आएंगे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि केंद्र सरकार देवकीनंदन ठाकुर पर इन्कम टैक्स का शिकंजा कस सकता है। देवकीनंदन के बाद दतिया जिले में पंडोकरधाम के संत गुरूशरण शर्मा ने खुलकर बयान दिया है कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना ही होगा।
वर्ना लोगों की नाराजगी का सामना करना होगा। दो दिन पहले उज्जैन में ब्राह्मण समाज के आंदोलन में मालवा संत कमलकिशोर नागर ने सरकार को लगभग चेतावनी देते हुए कहा कि यह कानून वापिस लेना ही होगा। उन्होंने संकेत में लोगों को इशारा किया कि तीन महीने बाद जब नेता वोट की भीख मांगने दरवाजे पर आएं तो उन्हें यह काला कानून जरूर दिखाएं। यहां उल्लेखनीय है कि मालवा में नागर का काफी प्रभाव है। लोग उन्हें सुनने और उनके दर्शन करने बड़ी सं या में पहुंचते हैं।
महाकौशल के गृह संत देवप्रभाकर शास्त्री दद्दा जी को मप्र में कांग्रेस और भाजपा के नेता बहुत ही स मान देते हैं। मप्र के कई मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में आमंत्रित कर बड़े आयोजन करते रहे हैं। इनमें पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कराना शामिल है। दद्दा फिलहाल छतरपुर में है और उन्होंने वहीं मीडिया से बातचीत में दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार को देश की सबसे बड़ी अदालत के आदेश को मानना चाहिए। इसे बदलकर सरकार ने ठीक नहीं किया है।

