अजमेर विधानसभा चुनाव -2018 भाजपा जमीन पर कांग्रेस जुबान

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अजमेर। राजस्थान विधान सभा चुनाव 2018 के लिए नामांकन की सोमवार को अंतिम तिथि है। अभी तक अजमेर विधानसभा की आठ सीटों में से कांग्रेस ने अपने सभी आठ प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं भाजपा की ओर से केकड़ी विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशी की घोषणा होना शेष है, इस बीच भाजपा की जमीन पर तो कांग्रेस की जुबान पर फतह तैर रही है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस को एक दूसरे के वार का नहीं बल्कि अपने ही बागियों की मार का ज्यादा डर सताने लगा है।
Ajmer assembly elections -2012 BJP announces Congress on land
आगामी 22 नवम्बर नाम वापसी होनी है। दोनों ही पार्टियों के अधिकृत उम्मीदवार अपने-अपने जातिय समीकरणों के आधार पर बागियों की हैसियत का तौल-मोल करने में जुट गए हैं। सच्चाई भी है प्रत्याशियों की चुनावी फतह का समीकरण चुनाव मैदान में अंत समय तक डटे रहने वाले बागियों के रास्ते से ही तय होना है।मौटे तौर पर देखा जाए तो अजमेर जिले की आठों सीट पर अंत समय भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला ही होना है।

संभाग में भाजपा की ओर से कट्टर हिन्दुत्व कार्ड खेले जाने से अभी तक एक भी मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया है किन्तु अब टोंक में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को घेरने के लिए भाजपा का यह कदम पीछे हट सकता है। कांग्रेस के प्रदेश प्रचार समिति के मुखिया एवं उपचुनाव जीते सांसद डॉ. रघु शर्मा को घेरने के लिए भाजपा की ओर से शेष रही केकड़ी सीट से वैश्य समुदाय में से किसी को उम्मीदवार बनाकर मत घु्रवीकरण को रोका जा सकता है।

गत चुनाव में मसूदा सीट बागियों के कारण खिचड़ी बन गई थी इस बार भी वहां ऐसे ही हालात बन रहे हैं। यह बात ओर है कि अजमेर की अन्य सीटों में किशनगढ़ और अजमेर की उत्तर व दक्षिण सीट पर भी भाजपा व कांग्रेस बागियों के कारण फिलहाल यही हालात दिखाई देते हैं।

हनुमान का किशनगढ़ में पड़ सकता है दांव-
भाजपा की ओर से मौजूदा विधायक एवं दो बार के विजेता जाट नेता भागीरथ चैधरी का किशनगढ़ से टिकट काट कर युवा चेहरे विकास चैधरी पर दांव खेले जाने से यहां शुरू हुई भाजपाइयों की खुली बगावत थमने का नाम नहीं ले रही। यहां से भाजपा के बागी बनकर किशनगढ़ नगर परिषद के पूर्व सभापति और मार्बल ऐसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश टांक तो कांग्रेस की अंतिम सूची में किशनगढ़ सीट से जाट प्रत्याशी के रूप में नंदाराम धाकण को उम्मीदवार बनाए जाने से कांग्रेस के बागी बनकर पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया अंत समय चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। बताते हैं कि सिनोदिया के समर्थक तीसरे मोर्चे के हनुमान बेनीवाल के भी सम्पर्क में हैं। सिनोदिया बेनीवाल की पार्टी के उम्मीदवार भी हो सकते हैं।

मसूदा में कय्यूम की चुनौती:
अजमेर जिले के मसूदा विधानसभा क्षेत्र से कांगे्रस के पूर्व विधायक हाजी कय्यूम खान ने बागी रुख अपना लिया है। कय्यूम 19 नवम्बर को नामांकन दाखिल करेंगे। लेकिन कांग्रेस के लिए यह राहत की बात है कि चीता समाज के प्रमुख नेता वाजिद चीता ने कांग्रेस के उम्मीदवार राकेश पारीक को समर्थन देने की घोषणा की है। मसूदा से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर वर्तमान विधायक श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा मैदान में हैं। हालांकि पारीक ने केकड़ी से दावेदारी जताई थी, लेकिन उन्हें मसूदा से उम्मीदवार बनाया गया। पारीक कांग्रेस सेवाादल के प्रदेश अध्यक्ष हैं। यहां से पारीक को भी बिहारी बताकर स्वयं कांग्रेसी विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

अजमेर दक्षिण में भाटी बने भाजपा की ढाल:-
कांग्रेस के टिकट पर गत चुनाव हार चुके उद्योगपति हेमन्त भाटी को अजमेर दक्षिण से दोबारा टिकट दिए जाने से खफा तथा व्यक्तिगत संपत्ति विवाद से नाराज उनके ही बड़े भाई कद्दावर कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री ललित भाटी ने ताल ठोक दी है। उनका इस तरह चुनाव मैदान में उतरना भाजपा के लिए ढाल माना जा रहा है। दक्षिण विधान सभा क्षेत्र से ही रेगर समुदाय के डॉ. राकेश सिवासिया के भी चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा को बड़ी राहत है। यहां से भाजपा ने लगातार चैथी बार अनिताभदेल पर भरोसा दशार्या है। अनिता भदेल गत सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री रही हैं। गत 15 सालों में मतदाताओं के किए व्यक्तिगत कार्य और सरकारी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के आधार पर उन्होंने जीत के लिए अपेक्षित, स्वयं अपना वोटबैंक तैयार किया हुआ है।