अमृतसर रेल हादसा: घटना की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश, नहीं ले रहा कोई जिम्मेदारी

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चंडीगढ़। अमृतसर में दशहरा के मौके पर रावण दहन के कार्यक्रम के दौरान हुए रेल हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। रेलवे ने विस्तार से बताया है कि ट्रेन के ड्राइवर ने हादसे को रोकने के लिए क्या कोशिश की और इसके बावजूद हादसा क्यों नहीं रोका जा सका। हालांकि हादसे के एक दिन बाद अब घटना की जिम्मेदारी भी एक दूसरे डालने का काम शुरू हो गया है। कार्यक्रम की चीफ गेस्ट नवजोत कौर का कहना है कि रेलवे को ट्रेनों के लिए निर्देश जारी करने चाहिए थे, जबकि रेलवे का कहना है कि कार्यक्रम की सूचना उन्हें दी ही नहीं गई थी।
Amritsar rail accident: Taking the responsibility of incident to each other, no responsibility
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने बताया है कि आखिर क्यों पूरी कोशिश करने के बाद भी यह हादसा रोका नहीं जा सका। लोहानी ने बताया है कि ट्रैक पर लोगों को देख ट्रेन के ड्राइवर ने अनहोनी टालने की कोशिश की थी। उन्होंने एक निजी चैनल को बताया है कि ड्राइवर ने ट्रेन की स्पीड 90 किमी/प्रतिघंटा से घटाकर 65 किमी/ घंटा कर दी थी। हालांकि, इतनी तेज स्पीड से आ रही ट्रेन को पूरी तरह से रुकने के लिए कम से कम 625 मीटर की दूरी चाहिए होती है। इसलिए, ट्रेन रुक नहीं सकी और 60 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि ट्रेन अगर इमरजेंसी ब्रेक लगा देती तो ट्रेन पलट सकती थी और हताहतों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी।

लोहानी ने बताया है कि ड्राइवर ने हॉर्न भी बजाया होगा। माना जा रहा है कि पटाखों और जश्न के शोर में आवाज सुनाई नहीं दी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि लेवल क्रॉसिंग वहां से काफी दूर थी। ऐसे में वहां बैठे अधिकारी चाहते भी तो कुछ नहीं कर पाते। हालांकि, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने दावा किया है कि ट्रेन ने हॉर्न बजाया ही नहीं था। इस बारे में उत्तर रेलवे के मुख्य जन संपर्क अधिकारी ने बताया है कि रावण का पुतला गेट्स से 70-80 मीटर की दूरी पर जलाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि जब पुतला जलकर गिरा तो लोग ट्रैक की तरफ भागे।

इससे पहले उन्होंने कहा था कि पुतला दहन देखने के लिए लोगों का वहां पटरियों पर एकत्र होना स्पष्ट रूप से अतिक्रमण का मामला था। इस कार्यक्रम (रावण दहन) के लिए रेलवे ने कोई मंजूरी नहीं दी थी। ट्रैक पर इतनी भीड़ होने के बावजूद ट्रेन ड्राइवर द्वारा गाड़ी नहीं रोके जाने को लेकर सवाल उठने पर एक अधिकारी ने कहा, वहां काफी धुआं था जिसकी वजह से चालक कुछ भी देखने में असमर्थ था और गाड़ी घुमाव पर भी थी।

सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
बता दें कि हादसे में अब तक 61 लोगों की मौत की पुष्टि प्रशासन ने की है। यह हादसा अमृतसर और मनावला के बीच फाटक नंबर 27 के पास हुआ है। यह हादसा जिस वक्त हुआ, उस समय वहां रावण दहन देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। इसी दौरान डीएमयू ट्रेन नंबर 74943 वहां से गुजर रही थी। घटना के बाद पंजाब सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया गया है।